वो 4 कारण जो बताते है चीन के राष्ट्रपति को भारत में बुलाना पैसे और वक्त की बर्बादी है

167

भारत और चीन के बीच में सदियों से व्यापार और राजनयिक रिश्ते बनते बिगड़ते रहे है. जब ये सरकारे और संचार नही था तब भी दोनों ही देशो के बीच में व्यापार आदि होता था और सब कुछ वैसे ही चलता था जैसे दो देशो के बीच में होता है लेकिन देखते ही देखते चीन पूरी तरह से बदल गया. एक अच्छी और बुद्ध विचारधारा को त्यागकर चीन एक नास्तिक कम्यूनिस्ट देश बन गया जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ पैसे कमाना ही रह गया है चाहे वो किसी भी कीमत पर ही क्यों न हो?

यही वो कारण है जिसके चलते दुनिया भर में कहा जाने लगा है कि चीन से न तो दोस्ती भली और न ही दुश्मनी. ऐसे में अब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आये है. चलिये हम आपको बताते है कि शी से मिलना और उन्हें टाइम देना प्रधानमंत्री मोदी के समय की और देश के धन की बर्बादी आखिर क्यों है?

  1. चीन प्रधानमंत्री मोदी से कोई भी ऐसी ख़ास औपचारिक मीटिंग नही कर रहा है, बल्कि ये अनौपचारिक ही रहेगी. यानी आप इसे महज चीनी राष्ट्रपति का ट्रिप समझ सकते है जिसमे दो देशो के अध्यक्ष एक संयुक्त बयान तक साझा नही करेंगे. ऐसी मीटिंग करके क्या फायदा है?
  2. चीन के राष्ट्रपति ने भारत आने के एक दिन पहले ही न सिर्फ इमरान खान से बात की बल्कि कश्मीर के मुद्दे को भी उठाकर पाक का समर्थन करने की बात कही, इससे चीन का दोगलापन सामने आ जाता है. चीन भारत के सबसे बड़े सामरिक मुद्दे पर भी खिलाफ है.
  3. चीन भारत की लाख कोशिशो के बावजूद भारतीय कम्पनियों के एक्सपोर्ट को चीन में बढ़ने नही दे रहा है जो व्यापारी असंतुलन बढाने वाला और भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा नही है. चीन किसी भी मीटिंग में भारत के व्यापारिक फायदे की भी कोई उम्मीद नही है.
  4. चीन वैश्विक मंच पर भी भारत के फेवर वाला देश नही है. चाहे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् हो या फिर अन्य वैश्विक संगठन हो. जहाँ जहाँ चीन को स्थायी सदस्यता और वीटो पॉवर मिला हुआ है वहां वहाँ चीन 99 प्रतिशत वीटो भारत के विरोध में ही इस्तेमाल करता है.

यानी चीन से न तो सामरिक लाभ है, आर्थिक लाभ है और न ही वैश्विक मंच को लेकर के चीन की तरफ से कोई नरमी होती है. अगर यही हाल रहता है और चीन के राष्ट्रपति सिर्फ भारत में आकर घूमकर के चले जाते है तो चीनी राष्ट्रपति की अगुवाई और सुरक्षा में किया गया करोडो का खर्च व्यर्थ ही है.