राम मंदिर केस: सुप्रीम कोर्ट में अंतिम सुनवाई से पहले मुस्लिम पक्ष ने अक्लमंदी वाली बात कही है

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जब भी हम लोग बात करते है सुप्रीम कोर्ट और उसके सबसे पुराने केसेज की तो उसमे एक केस है जिसका जिक्र तो हर जगह पर आता ही आता है और वो है राम मंदिर का केस. पिछले तीन दशक से अदालतों के चक्कर काट रहे राम लला को अब अपना आशियाना मिलने की उम्मीद नजर आने लगी है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अब अंतिम चरण में पहुँच चुकी है. हर पक्ष ने अपना जोर लगा दिया लेकिन इन सबके बीच में एक दिलचस्प बात निकलकर के सामने आयी है.

मुस्लिम बुद्धिजीवी समूह ने कहा, हिन्दुओ को तोहफे में दे दीजिये जमीन
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी मध्यस्थता की बात की थी और इसी बात पर एक पैनल बना है जिसमे मुस्लिम बुद्धिजीवी लोग है और उस पैनल को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व वीसी जमीरूद्दीन शाह देख रहे है. इस पैनल ने हाल ही में एक मीटिंग लखनऊ में की और दरख्वास्त की है कि ये जो भी अयोध्या में विवादित जमीन है इसे हिन्दुओ को तोहफे के रूप में दे दी जानी चाहिए और इसके पीछे वो अपने कारण भी दे रहे है.

उनका कहना है कि मान लीजिये अगर अदालत मस्जिद के पक्ष में फैसला दे देती है लेकिन क्या उसके बाद में भी क्या ये संभव है कि उस विवादित जमीन पर बहुसंख्यको के खिलाफ जाकर के सब मस्जिद बन जायेगी? हमें तो ऐसा बिलकुल भी नही लगता है और इसलिए इंडियन मुस्लिम्स फॉर पीस की तरफ से आग्रह किया गया है कि अब अयोध्या की जमीन हिन्दुओ को तोहफे के रूप में देकर के मुस्लिम लोग इस विवाद से पीछे हट जाए. देश में शान्ति और सौहार्द बनाने का ये अपने आप में बेहतरीन तरीका है.

लोग कर रहे अक्लमंदी की तारीफ़
सोशल मीडिया पर इस तरह की खबरे आने पर लोगो ने इसकी अच्छी खासी तारीफ़ की है क्योंकि अंतिम समय पर अगर मुस्लिम पक्ष से ही कुछ लोग इस तरह से गुहार लगाते है तो फिर ये एक अच्छा सन्देश देगा और राम मंदिर का शान्तिपूर्ण तरीके से निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा.