उद्धव ठाकरे ने इस वजह से माँगी अपने ही शिवसैनिको से माफ़ी

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कई बार यारी दोस्ती में फायदे होते है तो कई बार नुकसान भी झेलने ही पड़ते है और नुकसान की बारी आती है तो हर कोई वो नही होता है जो खुलकर के आगे आ जाये. राजनीति में भी दोस्ती होती है और शिवसेना बीजेपी की दोस्ती के बारे में तो सभी लोग जानते ही है. अब हाल ही में भाजपा शिवसेना के बीच सीटो को बंटवारे को लेकर के खींचतान हुई और उम्मीदों के अनुसार बीजेपी की विजय भी हो गयी मगर अब उद्धव ठाकरे को अपने पार्टी के लोगो को भी तो इस पर जवाब देना था.

उद्धव ठाकरे ने गठबंधन में कम सीटे मिलने पर मांगी शिवसैनिको से माफ़ी
शिवसेना ने मुंबई के शिवाजी पार्क में एक बहुत ही बड़ी और विशाल रैली बुलाई थी जिसमे उद्धव ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओ को समझाया कि उनके लिये उनकी विचारधारा के लिये भाजपा से गठबंधन करना जरूरी क्यों है? इसके बाद में उन्होंने गठबंधन के कारण जहाँ जहाँ सीटे छोडनी पड़ी उसके लिए अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं से माफ़ी भी मांगी. वो कहते है जिन जगहों पर कार्यकर्ताओं को संतोष करना पडा उन सभी से मैं माफ़ी चाहता हूँ.

राम मंदिर और सामान नागरिक सहिंता की उठायी मांग
उद्धव ठाकरे कही न कही ये भी कहते ही है कि उनकी राष्ट्रीय स्तर की मांगो को पूर्ण करने के लिए भाजपा से दोस्ती जरूरी है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की दो मांगे है जिन्हें उन्होंने एक बार फिर से उठाया. पहला तो अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और दूसरी सामान नागरिक सहिंता यानी एक देश एक क़ानून. पिछले लगभग तीन दशक से शिवसेना इस मुद्दे पर टिकी हुई है और भाजपा से उम्मीद लगाये हुए है कि वो जितना जल्दी हो सके इसे पूरा कर ही लेगी.

हालांकि दोनों पार्टियों के बीच में तनातनी का भी एक लंबा दौर चला था जिसमे शिवसेना अलग से चुनाव लड़ने का मन भी बना चुकी थी लेकिन फिर दोनों पार्टियों ने सूझ बूझ से काम लिया और अपने झगडे का फायदा कांग्रेस या मनसे को न लेने देने का निर्णय लेते हुए वापिस शिवसेना भाजपा साथ आ गयी.