चीन के राष्ट्रपति ने भारत आने से पहले ही दिखा दिया अपना दोगलापन

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चीन और भारत दोनों ही एशिया के काफी विकास की तरफ अग्रसर हो रहे देश है और दोनों की ताकत भी आपस में टक्कर की है लेकिन दोनों के बीच में एक बुनियादी फर्क है कि भारत अपनी जुबान का हर वक्त पक्का रहता है और चीन कभी भी इस मामले में खरा नही उतरता है. कभी अपने आपको इस पाले में रखता है तो कभी उस पाले में और चीन के भारत दौरे पर आने से ठीक पहले ही चीन ने पाक की साइड लेकर अजीब सी स्थिति पैदा कर दी है.

मोदी के न्यौते पर भारत आ रहे थे जिनपिंग, उससे पहले पाक के प्रधानमंत्री से मिलकर छेड़ दी कश्मीर पर बात
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बस अगले ही दिन भारत में दौरा है और उससे एक दिन पहले शी जिनपिंग ने न सिर्फ पाक से मुलाक़ात की बल्कि कश्मीर का मुद्दा भी उठाया और कहा चीन हर हालत में क्षेत्रफल के मामले में और कश्मीर के मुद्दे पर पाक का साथ देगा. अब सवाल ये उठता है कि भारत पर आने के ठीक एक दिन पहले ही इस मुद्दे को उठाने का भला क्या तुक है? या तो चीन सिर्फ भारत का आने का दिखावा भर करता है.

भारत के लिये सिर्फ पैसे की बर्बादी है चीनी राष्ट्रपति की ये यात्रा
चीन के राष्ट्रपति की भारत यात्रा अपने आप में भारत के लिए पैसे की बर्बादी है जिसमे शी जिनपिंग की सुरक्षा और मेहमाननवाजी में करोडो रूपये खर्च हो जायेंगे और जिनपिंग पीएम मोदी के साथ में एक संयुक्त बयान तक जारी नही करेंगे. न ही ऐसा कोई बड़ा व्यापारिक समझौता भारत के पक्ष में होने की उम्मीद है जिससे कि हमें फायदा हो क्योंकि चीन की लोलुपता से तो सभी लोग बखूबी वाकिफ ही है.

ऐसे समय में चीन जिस तरह से अब बर्ताव कर रहा है वो ठीक नही है. भारत कुछ एक संगठनों में परमानेंट मेंबर है जैसे कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् और इन्ही कारणों से भारत को मजबूरी में चीन से बेहतर सम्बन्ध बनाने की जरूरत पड़ती है. अगर भारत इनमे स्थायी सदस्यता हासिल कर लेता है तो फिर भारत के लिये चीन से सम्बन्ध रखना पाक जितना ही गैर जरूरी हो जाएगा क्योंकि चीन वैसे भी भारतीय कम्पनियों को बड़ी मात्रा में इन्वेस्टमेंट तो करने देता नही है और न ही अपने बाजार ढंग से खोलता है.