70 साल बाद भी गोडसे की अस्थियाँ नही की गयी है नदी में प्रवाहित, जानिये क्यों

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हिन्दू धर्म ही नही सभी धर्मो में कुछ एक प्रथा है जिसके अनुसार किसी भी व्यक्ति का अंतिम संस्कार वगेरह किया जाता है और हिन्दुओ में भी है. पहले किसी के भी शरीर को अग्नि दी जाती है और फिर जो अस्थियाँ और राख आदि होती है उसे एक बर्तन में भरकर गंगा या किसी नदी पर ले जाकर के उसमे प्रवाहित कर दिया जाता है. शायद ही ऐसा कोई सनातनी होगा जिसके साथ ऐसा न होता हो. गोडसे उन लोगो में से एक है जिनकी अंतिम इच्छा ही इतनी कठिन है जिसके चलते हुए वो आज भी कलश में है.

नाथूराम की अंतिम इच्छा थी, जब तक अखंड भारत का निर्माण न हो जाये मेरी अस्थियाँ प्रवाहित न हो
गोडसे के परिवार वालो को उसका अंतिम संस्कार करने का अवसर नही दिया गया था. सरकार ने उनके शरीर को अग्नि देकर उनकी अस्थियाँ उनके परिवार वालो को पकड़ा दी थी. वो अस्थियाँ आज भी पुणे में रखी हुई है और इसके पीछे उनकी अंतिम इच्छा है जिसमे वो कहते है ‘जब तक सिन्धु नदी स्वतंत्र भारत में न बहने लगे, जब तक अखंड भारत का निर्माण न हो जाये तब तक मेरी अस्थियाँ जल में प्रवाहित मत करना.’

गांधी से थी उनके कार्यो के चलते नाराजगी, कोई निजी शत्रुता नही थी
गोडसे ने खुद कहा है कि उनकी महात्मा गांधी से कोई भी निजी दुश्मनी नही थी लेकिन उनके कुछ कार्य ऐसे थे जो देश हित में नही थे इसलिए मैंने ये कार्य कर दिया. जनरल डायर के खिलाफ कार्यवाही के वक्त समर्थन न देना हो, भगत सिंह के मामले में हस्तक्षेप करने से बचना हो या जिन्ना के आन्दोलन और कार्यो को अनदेखा करना हो ये चीजे गोडसे को चुभ गयी थी और इसी वजह से उसने ये कदम भी उठा लिया.

खैर जो भी है अब दोनों ही इतिहास है और दोनों के ही अपने अपने फोलोवर भी है. सबके अपने अपने सोचने के तरीके है मगर इन सबके बीच में वो अस्थियाँ वही पर पुणे में रखी हुई अखंड भारत के इन्तजार में है जो शायद कभी पूरा हो या फिर न भी हो.