2 अक्टूबर पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने महात्मा गांधी को लेकर ये बात कही है

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भारतीय राजनीति के इतिहास में दो अक्टूबर काफी महत्वपूर्ण तारीख है क्योंकि इस दिन दो बड़े दिग्गज लोगो ने जन्म लिया था पहले तो गांधी जी और दुसरे शास्त्री जी. दोनों की अपनी अपनी विशेषताये रही और दोनों के ही अपने अपने फैन्स भी है. वैसे जब भी गांधी जी का नाम आता है तो वहाँ पर संघ का नाम जरुर आता है और दोनों को आपस में परस्पर विरोधी साबित करने की हर भरपूर कोशिश की जाती है लेकिन क्या वाकई में सत्य यही है? मोहन भागवत का बयान इस पूरी बात को साफ़ कर देता है.

संघ की शाखा में आये थे गांधी, अनुशासन की तारीफ़ भी की थी
आज के दिन ही मोहन भागवत ने गांधी से जुड़ा एक लेख लिखा और कही बाते भी कही. वो कहते है ‘महात्मा गांधी सन 47 में संघ की शाखा में आये थे और उन्होंने उनका अनुशासन देखकर के उनकी तारीफ़ भी की थी, तब उन्होंने संघ के संस्थापक हेडगेवार जी के मुलाक़ात भी की थी. उन्होंने संघ के लोगो के बीच में अनुशासन और जाति पांति के बारे में बिलकुल ही विभेदकारी भावना देखकर के अपनी प्रसन्नता व्यक्त की थी.’

संघ प्रमुख ने गांधी जी को लेकर ट्वीट भी किया
उन्होंने सिर्फ यही नही किया बल्कि ट्विटर के जरिये भी आज के दिन मोहन भागवत ने महात्मा गांधी को याद करते हुए भी काफी कुछ लिखा और कहा 150 वी उनकी जयंती पर उनकी तरह खुदको राष्ट्र की सेवा में देना चाहिए. उन्होंने ये सलाह भी दी है कि हमें गांधी जी को अपने आचरण में उतारना चाहिये. उनके बताये हुए मार्ग पर चलकर के हम अपने जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाये और भारत के विश्वगुरु बनाने में अपना योगदान दे.

कई लोग संघ और संघ प्रमुख के गांधी जी के प्रति इस कदर हुए झुकाव को लेकर के थोड़े से शॉक में जरुर है लेकिन जो भी है समय के साथ में बदलाव जरूरी है और गांधी के नाम की छाप इस देश में इस कदर है कि उनकी बेकद्री करके हिंदुस्तान में तो कोई भी भी एक सीढ़ी तक नही चढ़ सकता है.