राम मंदिर पर बाबरी के वकील ने वो कह दिया, जिसका सभी हिन्दू इन्तजार कर रहे थे

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जब भी देश के सबसे पुराने केसों की बात की जाती है तो उनमे एक नाम राम जन्मभूमि का भी आता है जिस पर तीन दशक से कोर्ट में मामला चल रहा है और अब ये सुप्रीम कोर्ट में पहुंचकर के अंतिम मोड़ पर आ चुका है. हर केस में हर व्यक्ति की अपनी दलीले होती है और इसमें भी हिन्दू पक्ष की अपनी दलीले थी और मुस्लिम पक्ष की अपनी लेकिन कोर्ट में सुनवाई का अंत आते आते अब बाबरी के पक्ष के वकील काफी ढीले ढाले होते हुए नजर आने लगे है और गुजारिशो पर ही टिक गये है.

बाबरी के वकील राजीव धवन ने माना अयोध्या को ही रामजन्मभूमि, बोले हमें पूरी तरह से बाहर मत करो
सुन्नी वफ्फ़ बोर्ड की तरफ से वकील राजीव धवन ने अपनी दलील  में कहा ‘हम मान लेते है कि विवादित स्थान पर ही राम भगवान् का जन्म हुआ था लेकिन पूरी जमीन को एक न्यायिक व्यक्ति का दर्जा नही दे सकते है. कोर्ट को जन्मस्थान के नाम पर सुनवाई ही नही करनी चाहिए थी. इस तरह की याचिकाए दाखिल कर हिन्दू पक्ष चाहता है कि दुसरे पक्ष को पूरा ही बाहर कर दिया जाये. वहाँ सिर्फ राम मंदिर बने और कुछ भी नही हो.’

क्या है इस दलील के मायने?
इस दलील के मायने अपने आप में बड़े ही ख़ास है क्योंकि जिस तरह से कोर्ट में राजीव धवन ने मान लिया है कि इसी जगह पर राम जन्मभूमि है तो इस हिसाब से हिन्दू पक्ष का यहाँ पर लम्बे कालांतर से अधिकार होना बनता है. वही बात हो अगर मस्जिद की तो उसका कोई कन्स्पेट ही मुस्लिम पक्ष के मजहब में नही है और न ही नमाज पढने के लिये उसे जरूरी माना गया है तो उनका केस वहाँ पर काफी कमजोर हो जाता है.

ऐसी स्थिति में संभव है आने वाले महज कुछ ही दिनों के भीतर कोर्ट राम मंदिर के पक्ष में ही फैसला दे दे क्योंकि सारे साक्ष्य हो या फिर तथ्य हो सब कुछ उनके पक्ष में ही जा रहे है. कोर्ट का कहना है कि वो नवम्बर मध्य तक इसका फैसला सुना देंगे जिसका सभी को इन्तजार है.