कश्मीर पर सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा, वो मोदी सरकार के लिये परेशानी खड़ी कर सकता है

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सरकार ने कश्मीर से जबसे अनुच्छेद 370 हटाया है तब से ही सुप्रीम कोर्ट के बाहर फरियादियो का जमावड़ा लगा हुआ है. कोई अपने घर वालो को मिलने के लिए दरख्वास्त कर रहा है, कोई महबूबा और अब्दुल्ला को लेकर फ़रियाद लेकर गया है, कोई वहाँ इन्टरनेट की बहाली चाह रहा है तो कोई सरकार के इस पूरे फैसले पर ही सवाल उठा रहा है. सुप्रीम कोर्ट को जो याचिकाये वाजिब लगी उन्हें कोर्ट ने एक्सेप्ट भी कर लिया है और सुनवाई चल रही है लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट कुछ ऐसा करने की बात कर रहा है जो कश्मीर के इतिहास में तो कभी नही हुआ.

चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा, जरूरत पड़ी तो कश्मीर का दौरा करके खुद हालात की जांच करूंगा
सुप्रीम कोर्ट में कश्मीर को लेकर जो याचिकाये है उनमे कोर्ट सरकार से कह रहा है कि वहाँ पर सामान्य जीवन की बहाली के लिए प्रयास हो. अब ऐसे में अगर अब भी सरकार कोई स्थिति साफ़ नही कर पाती है तो मैं खुद कश्मीर के दौरे पर जा सकता हूँ ताकि वहाँ की स्थिति को समझ सकूं. ये बात चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई के द्वारा कही गयी है.

क्या हो सकते है गोगोई के कश्मीर दौरे के परिणाम?
कहने को तो ये सिर्फ दौरा भर है लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जज को कश्मीर जाने पर मजबूर होना पड़ता है तो ये पाक और विपक्ष दोनों के लिये ही भुनाने वाला मसाला बन जाएगा जिसके जरिये वो मोदी सरकार पर निशाना साधने की कोशिश करेंगे. यही नही कश्मीर में वाकई में सख्ती तो है और ऐसे में हो सकता है रंजन गोगोई को वो पसंद नही आये तो इसका मतलब ये भी नही है कि वो चीज कश्मीर के भविष्य के हित में नही है क्योंकि सरकार ने जो कुछ किया है बड़ी व्यवस्था और सलाहकारों के जरिये किया है.

आपको बता दे इस मामले पर अगली सुनवाई 30 सितम्बर को होनी है. वही सरकार कह रही है इस पर अधिक चिंता करने की जरूरत नही है वक्त के साथ में हम सब कुछ सामान्य कर देंगे और किसी का कोई भी नुकसान नही होगा.