मोदी सरकार को 2014 के बाद पहली बार इतना बड़ा झटका लगा है, संकट बहुत गंभीर है

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प्रधानमंत्री मोदी की सरकार लगातार आर्थिक से लेकर रणनीतिक मोर्चे पर हर जगह अपनी पूरी मेहनत लगा रही है और कोशिश भी कर रही है कि उन्हें कामयाबी हासिल हो लेकिन ये उतना आसान भी नही है क्योंकि भारत पहले से ही काफी ज्यादा परेशानियो से गुजर रहा है और ऐसे में देश की आर्थिक स्थिति को पहले की तरह ही बरकरार रख पाना आसान नही है और इसी के साथ में अब आर्थिक जगत से एक बड़ी बुरी खबर सामने आयी है जो सरकार पर सवाल उठाने का मौका विपक्ष को साफ़ तौर पर दे देगी.

देश की जीडीपी घटकर महज 5 फीसदी हुई
रिपोर्ट के मुताबिक़ इस वित्तीय तिमाही में देश की जीडीपी काफी बुरी तरह से गिरी है और गिरकर के ये सीधे 5 फीसदी तक जा पहुँची है. इससे पहले ये दर 5.8 फीसदी तक आ पहुँची थी और अब इसमें और भी ज्यादा भारी गिरावट आयी है और ये इस बात का संकेत है कि देश के विकास की रफ़्तार में स्लोडाउन आ रहा है और ये सरकार के लिये चुनौतियां पेश कर सकता है.

क्या है इसके पीछे का कारण?
अचानक से जीडीपी के यूँ गिरने के पीछे का सबसे बड़ा कारण तो इंटरनेशनल लेवल पर चल रहा ट्रेड वार है जो अमेरिका और चीन के बीच में हो रहा है और इससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर असर पडा है. इसके अलावा जीएसटी से बहुत ही अच्छे लेवल का टैक्स कलेक्शन अभी तक हो नही पाया है, यानी व्यापारी टैक्स की चोरी जमकर कर रहे है, लोगो के अन्दर खर्च करने की क्षमता समाप्त हो रही है जो भी इसके पीछे का मुख्य कारण माना जाता है. इन सबके अलावा एक और कारण विदेशी इन्वेस्टमेंट का बढना लेकिन आवश्यकतानुसार न बढना भी है.

इससे क्या परिणाम निकालेंगे?
इससे परिणाम बुरे ही होने है. सरकार की क्षमता कम होती है तो इससे लोगो को गरीबी से निकाल पाना और ज्यादा मुश्किल होगा, नौकरियाँ जायेगी और आप ऑटो सेक्टर में तो जॉब जाते हुए देख ही रहे है और इसके अलावा लोगो का जीवन स्तर यानी लिविंग स्टैण्डर्ड भी कम होगा जो अपने आप में चुनौती है. हालांकि सरकार कोशिश कर रही है कि सब कुछ काबू में किया जाये.