कश्मीर पर सरकार के फैसलों खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई थी याचिका, कोर्ट से आ गया जवाब

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सरकार ने हाल ही में एक बहुत ही बड़ा और संवेदनशील फैसला लिया है जिसके बारे में फ़िलहाल तो किसी को उम्मीद तक नही थी. कश्मीर को आखिरकार 70 सालो के लम्बे वक्त के बाद में अनुच्छेद 370 को हटा दिया गया है और अब कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बिना किसी शर्त के बन चुका है जो अपने आप में एक बहुत ही बड़ी विजय है इस बात में कोई भी शक नही है लेकिन इसका विरोध होना भी लाजमी है क्योंकि लोकतंत्र में एक दुसरे से वैचारिक मतभेद रखने का अधिकार सबको है और ये बात खुद पीएम मोदी ने कही है.

तहसीन पूनावाला ने दायर की याचिका
कांग्रेस के काफी करीबी और जाने माने व्यक्ति तहसीन पूनावाला ने सरकार इस फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में दखल देने की मांग की थी और कहा था सरकार ने वहाँ पर कर्फ्यू लगा रखा है, कनेक्टिविटी से लेकर कई चीजो पर रोक है. कोर्ट ने इस याचिका को एक्सेप्ट भी कर लिया जिसके बाद से सुनवाई के पहले तक सभी दिल कुछ ज्यादा ही तेजी से धड़क रहे थे और ऐसा होना बनता भी है.

सुनवाई के पहले दिन ही सरकार की तरफ झुक गया कोर्ट, बोला ‘सरकार पर भरोसा करना होगा’
इस पूरे मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जवाब देते हुए कहा ये काफी संवेदनशील मुद्दा है और हमें कुछ दिन तक इन्तजार करना चाहिये. जम्मू कश्मीर में मुद्दा बेहद ही संवेदनशील है और इस वक्त ये सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी की जान न चली जाये. सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद में जोर देकर के कहा ‘हमें सरकार पर तो भरोसा करना ही होगा.’ इसके बाद में पूरी तरह से साफ़ हो जाता है कि सुप्रीम कोर्ट सरकार द्वारा उठाये गये कदमो पर भरोसा जता रहा है तो कोई संशय नही रह जाता कि इसमें कोई दखलअन्दाजी होगी. हालांकि पूरे हालात की समीक्षा 2 हफ्ते के बाद एक बार और की जायेगी.

सरकार के वकील ने आखिर क्या दलील दी?
अटोर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा हमे सबसे पहले तो जम्मू कश्मीर में शान्ति हो इस बात को सुनिश्चित करना है. वो सरकार के पक्ष को भी मजबूत करते है जिनका तोड़ तहसीन पूनावाला या फिर फारूक अब्दुल्ला के पास भी नही है जो इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात करते है.