सरकार के अगले कदम से मुसलमान फिर परेशान हो सकते है

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अभी कुछ समय पहले ही मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को संरक्षण प्रदान करते हुए मोदी सरकार ने तीन तलाक बिल पास किया है जिस पर देश में कई बड़े बड़े मौलानाओ और ओवेसी जैसे मुस्लिम नेताओं ने अपनी आपत्ति दर्ज करवाई थी लेकिन बहुमत के आगे किसी की भी न चल सकी और आखिरकार क़ानून लागू हो गया है. अभी इस गर्त से तो उबरे भी न थे कि नरेंद्र मोदी की सरकार के एक और नये काम की सुगबुगाहट आनी शुरू हो गयी है जिसे लेकर के कुछ लोग बेहद ही परेशान हो गये है.

जल्द ही संसद में पेश हो सकता है यूनिफार्म सिविल कोड
भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे में भी है और अब इस बात पर चर्चाये काफी तेज होगयी है कि आने वाले अगले संसदीय सत्र में सरकार यूनिफार्म सिविल कोड ला सकती है. इससे जो भी मजहब के आधार पर क़ानून बने हुए है वो सब समाप्त हो जायेंगे और पूरे देश के सभी नागरिको के लिये सामान क़ानून होंगे. इसका सबसे ज्यादा नुकसान मुस्लिम पर्सनल लॉ और उसके बोर्ड को होगा क्योंकि वो लगभग खत्म ही हो जायेंगे. प्रशासनिक से लेकर सारे सामाजिक कार्य एक ही तरह के क़ानून के दायरे में करने होंगे.

शिवसेना के नेता संजय राऊत ने दिया है संकेत
एनडीए गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना के नेता संजय राऊत ने बयान जारी करते हुए कहा ‘कितने समय तक मुस्लिम राष्ट्र की विचारधारा से अलग रहेंगे. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को भी सामान नागरिक संहिता का समर्थन करना चाहिए. इससे पूरे समाज का भला ही होने वाला है’. संजय राऊत का ये बयान भी बताता है कि पार्टियों में हलचल तो शुरू हो गयी है लेकिन ये वाकई में संसद तक बिल के रूप में कब तक पहुँचती है ये देखने वाली बात होगी.

भारतीय जनता पार्टी इसे एजेंडे के रूप में लेकर के जरुर चल रही है लेकिन इसका बिल लाना और इसे देश भर में लागू कर पाना बेहद ही मुश्किल होगा क्योंकि कई बड़े बड़े संगठन इसका विरोध करेंगे और ऐसे में लॉ एंड आर्डर मेंटेन करना कश्मीर की तुलना में भी कई ज्यादा मुश्किल होने वाला है इस बात में कोई भी शक नही है.