नीतीश ने फिर निभायी मोदी से दोस्ती, ऐन मौके पर आकर बचा लिया

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भारतीय जनता पार्टी वैसे तो देश की सबसे बड़ी और एकछत्र राज करने वाली पार्टी बन चुकी है मगर फिर भी लोकतन्त्र है और यहाँ पर किसी भी व्यक्ति या फिर पार्टी के हाथ में पूरी पॉवर कभी भी नही रहती है और ये बात सच भी है. सरकार को जब भी कोई क़ानून पास करवाना होता है तो उन्हें सभी के साथ की जरूरत पड़ती ही पड़ती है. ऐसे में हर किसी का अपना अपना एजेंडा होता है. अब जेडीयू चाहे एनडीए का हिस्सा है लेकिन इसके बावजूद उसके अपने क़ानून कायदे और एजेंडे है जिनके आधार पर वो राजनीति करती है लेकिन कभी कभी दोस्ती के लिए झुकना भी पड़ता है.

मोदी ने किया था तीन तलाक बिल पर नीतीश कुमार को फोन, छोड़ दिया विरोध
तीन तलाक बिल पर सभी जानते है जहाँ बीजेपी इस बिल को पास कराना चाहती थी वही कई पार्टियां जिनमे जेडीयू भी शामिल है वो इसके पक्ष में ही थी. वो इसके विरोध में थी ऐसा भी आप कह सकते है लेकिन जब राज्यसभा में ये बिल जब वोटिंग के लिए आया तो मोदी जी ने नीतीश कुमार को फोन किया और उनसे कहा सपोर्ट की जरूरत है.

अब नीतीश कुमार पूरी पार्टी के खिलाफ तो नही जा सकते थे और न ही जेडीयू के सांसद तीन तलाक बिल के पक्ष में वोट डालने को राजी होते तो ऐसे में जेडीयू के कहने पर उनके सारे सांसद राज्यसभा से वाकआउट कर गये. यही काम उन्होंने लोकसभा में भी किया था और राज्यसभा में भी किया है. इससे हुआ क्या? इससे विरोध में पड़ने वाले वोट कम हो गये और पक्ष वालो का पलड़ा भारी हो गया जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी इस बिल को पास करवा पाने में कामयाब हो गयी वरना दिक्कत तो आती ही आती.

इससे पता लगते है भविष्य में बिहार के समीकरण
जिस तरह से नीतीश फिर से मोदी के करीब आ रहे है उससे ये बात भी साफ़ हो ही जाती है कि बीजेपी और जदयू मिलकर के बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे और इससे बुरी खबर आरजेडी के लिए कोई और हो नही सकती है क्योंकि वो पहले से ही अस्तित्व के लिए जूझ रहे है.