तीन तलाक पर राज्यसभा में वोटिंग पूरी हो चुकी है, आ गया अंतिम फैसला

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मुस्लिम महिलाये काफी लम्बे समय से अपने हक़ की लड़ाई लड़ रही थी और उनका हक़ था तीन तलाक से आजादी का. हर कोई चाह रहा था कि तीन तलाक जैसी सामजिक कुरीति से उन्हें आजादी मिले और इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी ने क़ानून बनाने का फैसला भी किया. वो कई बार क़ानून लेकर के भी आये लेकिन बहुमत के अभाव में ये हो नही पाया मगर उन्होंने हार नही मानी और एक बार फिर से लाये.

सदन से आखिरकार पास हुआ तीन तलाक बिल
लोकसभा से तीन तलाक का बिल पहले से ही पास हो चुका था क्योंकि वहाँ पर बीजेपी के पास में सारा का सारा बहुमत था लेकिन सारा पेच यहाँ पर राज्यसभा का अटक रहा था लेकिन आखिरकार बीजेपी ने यहाँ पर सदन में 99 मतो के साथ में जीत हासिल कर ली. इसके खिलाफ में कुल 84 मत भी पड़े. अब सवाल ये भी है कि आखिर सिर्फ 99 मतो पर कैसे? तो दरअसल बीजेडी और जदयू जैसे कई दल जो खिलाफ में वोट कर सकते थे वो सभी वाक आउट कर गये ताकि मोदी नाराज न हो. चलिए अब जानते है इस क़ानून के आने के बाद में क्या कुछ बदलने वाला है?

  1. अब तीन तलाक कोई सामाजिक समस्या नही बल्कि एक क्रिमिनल एक्टिविटी के अंतर्गत आएगा.
  2. जो भी शौहर अपनी बीवी को तीन तलाक देगा उसके लिये तीन साल की सजा का प्रावधान किया गया है. इस प्रावधान को लेकर के ही सारी की सारी माथापच्ची चल रही थी.
  3. पहले इसे गैर जमानती अपराध बना दिया गया था लेकिन अब मजिस्ट्रेट को मसले को पूरी तरह से देखने और जांचने परखने के बाद में आरोपी को जमानत देने का अधिकार दे दिया गया है.
  4. पीडिता या फिर उसका कोई भी सगा रिश्तेदार पुलिस थाने में जाकर के आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा सकता है.
  5. इस मामले में अगर समझौते की कोई गुंजाइश नजर आती है तो मजिस्ट्रेट के सामने समझौता भी हो सकता है. इसमें पत्नी की सहमती को प्राथमिकता पर रखा जा रहा है.

तो कुछ इस तरह से तीन तलाक का बिल पास करवा दिया गया है जो मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐतिहासिक दिन बताया जा रहा है. इसे अब राष्ट्रपति के पास में पास होने के लिए भेजा जाएगा और फिर ये एक क़ानून का रूप ले लेगा.