निजी स्कूल वालो की दादागिरी होगी खत्म, सरकार ला सकती है ये नया क़ानून

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किसी भी पति पत्नी का बच्चा जब 3 साल का हो जाता है तो उन्हें एक चिंता होने लग जाती है और वो चिंता होती है उसे स्कूल में भेजने की. जैसी आज की तारिख में देश के सरकारी स्कूलों की हालत है उसके बादमे माँ बाप अपने बच्चे को निजी स्कूल में भेजते है और फिर यहाँ पर उन्हें स्कूल वालो से बहुत ही ज्यादा परेशानी झेलनी पडती है. ख़ास तौर पर फीस के नाम पर न जाने क्या क्या पैसा वसूला जाता है? ये तो वही लोग ही जानते है और अब लगता है इस पर सरकार की नजर पड़ चुकी है.

राज्यसभा में उठी मांग, निजी स्कूलों में फीस का हो नियमन
राज्यसभा में अधिकतर सांसदो ने बीते शुक्रवार को संसद में मांग की है कि स्कूलों में फीस का नियमन किया जाना चाहिये. बीजेपी के ही सांसद श्वेत मलिक ने कहा ‘ कुछ निजी उद्योगपतियों ने स्कूलों को कारोबार का जरिया बना लिया है. वो पहले  पेरेंट्स से डोनेशन लेते है फिर इमारत की फीस लेते है और बादमे यूनीफोर्म और कॉपी किताबे चार गुना कीमत पर खरीदने पर भी मजबूत करते है.’ इन सबको रोके जाने को लेकर के एक ड्राफ्ट तैयार किया जाना चाहिये जो इन सब पर रोक लगा सके.

क्या हो सकता है नये क़ानून में?
अब क्योंकि ये मांग करने वाले भी बीजेपी के सांसद है तो इसका विधेयक भी जल्द ही आ सकता है. इसमें स्कूलों द्वारा फीस की रकम को उनके इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधार पर निर्धारित किया जा सकता है. जो भी यूनिफार्म या कॉपी बुक स्कूल से मिले उन पर निर्धारित रकम या अधिकतम रकम भी तय की जा सकती है जिससे अधिक कोई भी स्कूल वसूल नही कर सकेगा. अभी बीजेपी का कहना है कि इस विषय पर वो गंभीरता से विचार कर रहे है और जल्द एक समाधान सामने आयेगा.

एक दावे के अनुसार उत्तर प्रदेश की निजी स्कूलों में फीस में लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और बाकी राज्यों के स्कूलों का भी यही हाल है. ऐसी स्थिति में जरूरी है कि असहाय हो चुके अभिभावकों का सहारा कोई और न सही लेकिन सरकार तो बने.