इजरायल की किताबो में भारत के बारे में पढ़ाई जाती है ये बाते, जो हमें ही नही पता

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हिन्दुस्तान का इतिहास अपने आप में बेहद ही गर्व करने वाला है जहां हजारो साल का ऐसा इतिहास रहा है जिसने युद्ध में कई विजयगाथाये लिखी जाती है और इसके बावजूद अगर आप स्कूली किताबे भारत की टटोलेंगे तो आपको सिर्फ अकबर महान, बाबर महान जैसी किताबे देखने को मिलेगी. उनके ही पाठ पढाये जायेंगे लेकिन जहाँ हिन्दुस्तान अपने ही इतिहास से महरूम रहा वहाँ दुसरे देश हिन्दुस्तान की शौर्यगाथाओं का बखान करने से नही चूकते है और हकीकत में इजरायल की किताबो में भारत के शूरवीरो का जिक्र मिलता है.

भारत के जवानो ने करवाया था तुर्की से इजरायल के शहर को आजाद
एक समय था जब इजरायल गुलाम मुल्क था और उनपर तुर्की के ऑटोमन साम्राज्य का राज था. उनकी फौजे इतनी मजबूत थी कि उनसे ब्रिटेन की अपनी फ़ौज भी टकराने से घबराती थी. ऐसे में ब्रिटेन ने अपनी कॉलोनी बन चुके भारत के फौजियो से वहाँ पर जाने को कहा. मेजर दलपत सिंह जो राजस्थान के एक देहाती क्षेत्र के रावणा राजपूत समाज से आते थे उन्होंने अपने जवानो के साथ इजरायल के हाइफा शहर की तरफ कूच कर दिया. काफी मशक्कत के बाद में भारतीय फ़ौज ने न सिर्फ इजरायल के एक हिस्से को आजाद करवाया बल्कि तुर्की के लगभग 700 सैनिको को भी बंदी बन लिया.

पीएम मोदी भी इजरायल जाकर देकर आये श्रद्धांजली
पिछले 70 सालो से किसी प्रधानमंत्री ने इजरायल जाने की जरूरत नही समझी लेकिन मोदी वहाँ गये और वहाँ के प्रधानमंत्री बेंजामिन के साथ में हाइफा के हीरोज के लिए बने मेमोरियल पर श्रद्धांजली अर्पित की. ये बताता है कि वो देश के लिए कितना कुछ सोचते है.

इजरायल के पाठ्यक्रमो में मिलता है जिक्र, ब्रिटेन भी करता है सलाम
इजरायल में न सिर्फ भारतीय सेना के फ़ौज के लिए मोनुमेंट बने है बल्कि उनके बारे में इजरायल की स्कूली किताबो में भी पढाया जाता है कि किस तरह से भारतीय फ़ौज ने इतिहास में हमारी मदद की थी. ब्रिटेन ने भी उनके इस जज्बे को सलाम किया और शहीद मेजर दलपत सिंह को मरणोपरांत विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित किया गया. उनके बारे में ब्रिटेन में भी कई बार चर्चा देखने को मिली है और इतिहास में दर्ज किया गया है.