शीला दीक्षित नही रही, आराम करने की सलाह के बावजूद करती रही काम और..

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दिल्ली की चहल कदमी बड़े ही सामान्य तरीके से चल रही थी तभी भरी दुपहर में एक बुरी खबर आती है और हर तरफ सन्नाटा छा जाता है. वो नेता जो कांग्रेस में काफी बड़े पद पर बनी रही, जिसकी छाँव में दिल्ली ने 15 साल निकाल दिए और जिस पर भ्रष्टाचार का अभी तक दाग साबित नही हो पाया वो शीला दीक्षित अब इस दुनिया में नही रही. फेसबुक से लेकर ट्विटर पर पर श्रद्धांजली देने वालो की बाढ़ आ गयी. कुछ लोगो की आँखों से आंसू थे तो कुछ यकीन नही कर पा रहे थे क्योंकि कुछ दिन पहले तो वो काम कर रही थी.

काफी समय से थी अस्पताल में भर्ती
शीला दीक्षित की उम्र अभी 81 साल हो चली थी और ऐसे में अधिक काम और टेंशन के चलते उन्हें लगातार सलाह दी जा रही थी कि उन्हें आराम करना चाहिए लेकिन वो पार्टी के लिए बस लगी हुई थी. उन्हें कई बार अस्पतालों के चक्कर निकालने पड़े और अभी हाल ही में तो वो एस्कोर्ट अस्पताल में पूरे 10 दिन तक आईसीयू में भर्ती रही. अब वो अपने शरीर को संभाल नही सकी और अचानक से उन्होंने अपनी देह को त्याग दिया जिसकी खबरे तडके सब तक पहुँच गयी.

पंजाब की लड़की जो 3 बार मुख्यमंत्री रही
पंजाब के कपूरथला में जन्मी शीला दीक्षित ने राजनीती के लिये देश की राजधानी दिल्ली को चुना और संघर्ष करके वो यहाँ पर 3 साल मुख्यमंत्री रही. उन पर निजी तौर पर इस दौरान कोई भ्रष्टाचार का आरोप साबित नही हो सका. उनके कार्यकाल के दौरान दिल्ली ने खूब विकास किया. शीला दीक्षित के कार्यकाल में ही मेट्रो परियोजानो का काम हुआ, दिल्ली की बड़ी बड़ी फॉर लेन और टू लेन सड़के बनी, कनोट प्लेस का नाक नक्श बदला, जगह जगह बाग़ बगीचे बने, फ्लाई ओवर बने और तमाम काम हुए. इसके बाद वो केरल के राज्यपाल के पद पर भी रही.

अंतिम सांस तक सिद्धांतो से नही किया समझौता
शीला दीक्षित ने आखिरी दम तक झुकना सीकार नही किया. उनके पास अपनी जिन्दगी के अंतिम पड़ाव में केजरीवाल के साथ मिलकर दिल्ली में सरकार बनाने का मौका था जिसके लिए हाई कमान भी राजी था लेकिन शीला दीक्षित के दखल के कारण आप और कांग्रेस का गठबंधन नही हो सका.