वो 4 कारण जिससे मालूम चलता है रांची कोर्ट में ऋचा भारती के साथ बड़ी नाइंसाफी हुई है

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देश में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाये रखना जरूरी है और कही न कही ये जरुरी भी है ताकि आम आदमी अपनी इच्छा के साथ और शान्ति के साथ में समाज में जी सके. लोगो से गलतियां होती है, गुनाह होते है जिससे लोगो की भावनाए आहत होती है तो उस पर कोर्ट है जो संविधान के आधार पर सजा या फिर जेल मुकर्रर करता है मगर हाल ही में जो हुआ है वो अपने आप में बेहद ही संदेहास्पद है. ऋचा भारती नाम की 19 साल की लड़की जिसने अपने फेसबुक अकाउंट से किसी अन्य व्यक्ति की पोस्ट को शेयर कर दिया था जिसमे हिन्दू मुस्लिम एंगल पर कुछ बाते कही गयी थी.

इसे देखकर के कुछ लोगो के द्वारा ऋचा भारती के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया गया, प्रदर्शन हुए और दबाव में आकर पुलिस को भी ऋचा को तुरंत अरेस्ट करना पड़ा जिसके बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया और अदालत ने केस में अभी तक सजा नही सुनाई है लेकिन ऋचा को जमानत दे दी है. जमानत की शर्त ये है कि उसे 5 कुरान बांटनी होगी ताकि वो अन्य धर्मो का सम्मान सीख सके. अब कोर्ट ने फैसला तो दे दिया लेकिन इस फैसले का संविधान के साथ ही विरोधाभास है.

  1. कोर्ट ने मुकदमा केवल ऋचा भारती पर ही चलाना जारी रखा जबकि वो मुख्य अभियुक्त कही ही नही जा सकती है क्योंकि ऋचा ने केवल किसी अन्य व्यक्ति की पोस्ट को शेयर किया था तो असल दोषी तो वही कहा जाएगा जो इस मेसेज के मूल में है, क्या केवल ऋचा को सजा देकर बाकी पूरे मसले से पल्ला नही झाड लिया जाएगा?
  2. ऋचा को कुरान बांटने का आदेश दिया गया है. वो इसे मानना भी नही चाह रही है यानी उस पर कोर्ट के द्वारा ही न चाहते हुए भी किसी और धर्म के प्रचार का दबाव बनाया जा रहा है. क्या ये संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन नही है?
  3. रांची हाई कोर्ट एक संवैधानिक संस्था है और उनका किसी भी राजनीतिक पार्टी या फिर धर्म से सम्बन्ध कैसे हो सकता है? या वो धर्मनिरपेक्ष देश में किसी धर्म को प्रमोट कैसे कर सकते है? संविधान की पुस्तक बांटने का आदेश देना तो समझ में भी आता है लेकिन कुरान बांटने का आदेश देने के लिए कोई भी तर्कसंगत बात नही है.
  4. देश में बड़े बड़े आरोपियों को निजी मुचलके पर जमानत दे दी जाती है जहाँ पर कोर्ट उनसे कुछ हजार से लाख रूपये तक भी वसूल करता है. उनके केस में जमानत मिलने में और ऋचा के केस में जमानत मिलने में अंतर क्यों है?

ऋचा का कहना है कि वो इसे अपने अधिकारों के खिलाफ मानती है और उनके वकील का कहना है कि जैसे ही उन्हें कोर्ट के आदेश की प्रति मिलेगी तो वो उपरी अदालत में इसके खिलाफ अपील कर सकते है. खैर मसला तो काफी गंभीर हो ही चला है.