मोदी सरकार ने बदल दिया ये सालो पुराना क़ानून, काम करवाने वाला मालिक नही कर सकेगा दादागिरी

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प्रधानमंत्री मोदी जबसे सत्ता में आये है तब से वो इस पक्ष में है कि संविधान को बने हुए 70 साल के करीब हो गये है और ऐसे दौर में कही न कही समाज बदला है, नयी टेक्नोलॉजी आयी है. ऐसे में जरूरत है उन कानूनों को बदला जाये जो लोगो के लिए परेशानी का सबब बने हुए है या फिर देश की तरक्की के आड़े आ रहे है. चलिए फिर जानते है उस बदलाव के बारे में जो मोदी सरकार की तरफ से हाल ही में किया गया है और इससे लगभग 40 करोड़ लोग प्रभावित होने वाले है.

सरकार ने दी ‘कोड ऑफ ओक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग बिल, 2019’ को दी मंजूरी
इस बिल में कर्मचारियों के हितो को ध्यान रखते हुए काफी सारे बदलाव किये गये है जिसमे न्यूनतम वेतन से लेकर काम करने वाले कर्मचारियों के काम करने के तरीके ओवर टाइम समेत उसके अधिकारों के बारे में भी जिक्र मिलता है तो चलिए फिर पॉइंट टू पॉइंट जानने की कोशिश करते है इस बिल के आने के बाद में क्या कुछ बदल जाने वाला है?

  1. अब कामगारों की मजदूरी न्यूनतम 178 रूपये निर्धारित कर दी गयी है. अगर इससे कम पर कोई काम करवाता है तो ये गैरकानूनी होगा. आपको बता दे कई ठेके पर दिए काम पर आज भी देश में 100 रूपये प्रतिदिन से भी कम पर लोग काम कर रहे है.
  2. ये नियम उन कम्पनियों पर लागू होगा जिसमे 10 से अधिक कर्मचारी या फिर मजदूर काम करते है. उससे कम वाली कम्पनियाँ इसके दायरे में नही आती है.
  3. कम्पनियो को एक निश्चित उम्र के बाद में अपने कामगारों का हेल्थ चेक अप करवाते रहना होगा और उन्हें केन्टीन जैसी सुविधा भी मुहैया करवानी होगी.
  4. महिलाओं के लिए वर्किंग घंटे सुबह 6 बजे से 7 बजे शाम तक का ही हो सकता है. यानी अब महिलाओं को रात को काम करने के लिए बाध्य नही किया जा सकेगा.
  5. अगर इसके बावजूद भी किसी कारण से महिला रात को काम करती है तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कम्पनी पर होगी और कोई अनहोनी होती है तो उसकी जिम्मेदार भी कम्पनी ही होगी.

इन नियमो के आने के बाद में लगभग चालीस करोड़ लोगो पर इसका प्रभाव होगा. इस क़ानून के आने के बाद में 13 के करीब श्रम क़ानून खत्म हो जायेंगे और उनकी जगह पर सिर्फ ये एक क़ानून रह जाएगा जिससे लोगो के लिए या फिर यूँ कहिये कर्मचारियों के लिए अपने अधिकार समझ पाना और आसान होगा.