राम मंदिर पर हिन्दुओ के साथ फिर से बड़ी ठगी हो गयी

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पिछले लगभग तीन दशक से अयोध्या राम मंदिर का मसला कोर्ट के चक्कर निकाल रहा है और राम मंदिर बनाने को आतुर लोग बस बाहर ही बैठे हुए दिखाई देते है. ऐसी स्थिति में मामला हाई कोर्ट से होते हुए देश की सर्वोच्च अदालत में पहुँच तो गया है लेकिन लगता है राम मंदिर को लेकर के कोई भी संजीदगी देखने को नही मिल रही है. एक आखिरी उम्मीद थी कि मध्यस्थता होगी और जल्द से जल्द मंदिर का निर्माण कार्य शुरू होगा लेकिन वहाँ पर भी कोर्ट की सारी तरकीबे फेल होती हुई नजर आ रही है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था मध्यसत्ता से निकले हल
राम मंदिर से जुडी विवादित जमीन के लिए एक मुस्लिम पक्षकार है, एक रामजन्मभूमि न्यास है, एक निर्मोही अखाडा है और इनमे से अधिकतर मध्यस्थता के सब साथ नजर आये. हिन्दू महासभा ने कही कही पर विरोध किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद में एक टीम बनी जिसे काम दिया गया कि वो इन सभी के बीच मध्यस्थता करे और 15 अगस्त तक रिपोर्ट देकर के मामले को सुलझा दे. सभी को लगा अब तो इस विवाद का अंत हो ही गया समझो मगर ऐसा बिलकुल भी नही हुआ.

फेल हुई मध्यस्थता, दायर याचिका
सभी पक्षकारो में से एक पक्षकार है गोपाल सिंह जिन्होंने कोर्ट में एक याचिका दायर करते हुए कहा कि मध्यस्थता चलते हुए महीनो बीत गये लेकिन इस पर कोई भी काम नही हुआ है. इससे कोई भी समाधान होते हुए नजर नही आ रहा है. उन्होंने इस मध्यस्थता के रास्ते को छोडकर के कोर्ट से इस पर तत्काल सुनवाई करने की मांग की है. कोर्ट ने भी उनसे आवश्यक आवेदन प्रक्रिया शुरू करने के लिए कह दिया है. अब कोर्ट में मामला फिर से उसी तरह से चलेगा.

ठगे गये याचक
सुप्रीम कोर्ट ने जो तरीका सुझाया था और जिन लोगो को ये काम सौंपा था वो लोग इस काम को करने में लगभग विफल ही हो गये है और ऐसे में वो हिन्दू और राम भगवान् के भक्त कही न कही ठगा हुआ सा महसूस कर रहे है और करना भी चाहिये. अब कोर्ट फिर से प्रक्रिया शुरू करेगा, सुनवाई होगी और कोई समाधान नजर आ नही रहा है.