शादी करने पर पति पत्नी को घर बसाने के लिये ढाई लाख देती है मोदी सरकार, ऐसे करे आवेदन

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जब भी कोई शादी करता है तो उसके खर्चे खूब बढ़ जाते है और लाखो बह जाते है लेकिन अगर हम कहे आपको शादी करने पर खर्चा करना नही बल्कि आपको सरकार पैसे देगी तो आपको कैसा लगेगा? ये बात सुनने में थोड़ी सी अजीब लग रही होगी लेकिन सरकार इस तरह की योजनाये भी चलाती है लेकिन जानकारी के अभाव में लोग इनका लाभ लेने से चूक जाते है. चलिये फिर आपको बताते है कि ये सब किस मिशन के तहत किया जा रहा है? हालांकि ये शुरू मनमोहन सरकार के वक्त हुआ था लेकिन मोदी सरकार भी इसे जारी रखे हुए है.

अंतर्जातीय विवाह को बढ़ावा देने के लिये मिलता है पैसा
देश में जातीय भेदभाव काफी ज्यादा है और इसे खत्म करने के लिए ही सरकार अम्बेडकर स्कीम फॉर इंटीग्रेशन थ्रू इन्टरकास्ट मैरिज मैरिज स्कीम चलाती है जिसके तहत दलित समुदाय की लडकी या फिर लड़के से शादी करने पर उन्हें आर्थिक सहायता दी जाती है और कोई भी विवाद होने पर सुरक्षा तो ही जाती है. इससे कही न कही हिन्दू समाज को एक करने में और जातीय व्यवस्था पर प्रहार करने में सरकार को खासी कामयाबी मिली है.

चलिये जानते है कैसे उठाया जाता है इस स्कीम का लाभ और आपको इसमें किस किस तरह के दस्तावेजो या फिर नियमो की जरूरत होगी.

  1. शादी करने वाले नवदम्पति में से कोई भी एक दलित समुदाय का होना चाहिए और एक दलित समुदाय के बाहर का होना जरूरी है.
  2. ये शादी हिन्दू अधिनियम 1955 के तहत रजिस्टर करवाना अभी बेहद ही अनिवार्य है. इसके लिए आपको एक छोटा सा एफिडेविट देना होना है जो कोई बड़ा या फिर मुश्किल काम नही है.
  3. शादी होने के बाद में आपको इस सम्बन्ध में जानकारी अम्बेडकर फाउंडेशन को एक साल के अन्दर इसकी जानकारी देनी होगी. जानकारी मिलने के बाद में आपकी रकम को प्रोसेस किया जाएगा.
  4. इसमें आपको कुछ दस्तावेज भी देने होते है जिसमे जन्म प्रमाण पत्र, मैरिज सर्टिफिकेट, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और दोनों ही पति पत्नी के बैंक अकाउंट की डिटेल शामिल है.

अगर अम्बेडकर फाउंडेशन आपको सभी मानको पर खरा उतरता पाता है तो ऐसी स्थिति में आपको ढाई लाख रूपये दे दिए जाते है जिससे आप अपना गुजर बसर कर सकते है या फिर अपने लिए कोई भी आय का स्त्रोत बना सकते है, बिजनेस खड़ा कर सकते है. आगे सब कुछ आपकी इच्छा पर निर्भर करता है और यकीन मानिए अब तक बहुत बड़ी संख्या में जोड़े है जिन्होंने इसका लाभ उठाया है.