आखिर सोनिया गाँधी ने अपने पति राजीव की जान लेने वाली महिला को फ़ासी से क्यों बचा लिया?

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देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम तो आपने सुना होगा और खूब सुना होगा. उनका नाम कुछ एक रिफोर्म लाने के लिए भी लिया जाता है तो कुछ बड़े भ्रष्टाचारो में भी राजीव गांधी का नाम आता है. ये सब बाते साइड में रखते है तो उनकी जिन्दगी के आखिरी पल तो बिलकुल भी अच्छे नही थे क्योंकि उन पर हमला हुआ था जब वो अपने समर्थको से मालाये पहन रहे थे. धमाका हुआ और राजीव नही रहे मगर पीछे बहुत सारी गुत्थी छोड़ गये जिसे सुलझाया गया और कई लोगो को गिरफ्तार भी किया गया जिसमे मुख्य अभियुक्त के तौर पर सामने आयी नीलिमा.

नीलिमा को इसके पीछे बताया गया. नीलिमा ने जब ये काम किया उस वक्त वो गर्भवती थी और उसने जेल के अन्दर ही अपनी बच्ची को जन्म भी दिया. बच्ची को उसके रिश्तेदारों के पास में भेज दिया गया और नीलिमा को कोर्ट ने फ़ासी की सजा दी. अब प्रधानमंत्री से जुड़ा मामला था तो इसमें कोई भी अपील काम नही करती लेकिन ये काम कर दिखाया सोनिया गांधी ने.

सन 2000 में सोनिया गांधी ने खुद इस मामले में दखल दिया और कोर्ट से अपील की कि वो उस महिला को चाहे तो उम्रकैद की सजा दे दे लेकिन उसकी जान न ले. सोनिया ने इसके पीछे की दलील दी कि नीलिमा की अपनी छोटी बच्ची है जिससे वो माँ का साया नही छीनना चाहती है. कोर्ट ने उनकी बात मान भी ली और नीलिमा को इस वजह से उम्रकैद की सजा दे दी गयी. राजीव गांधी को पसंद करने वालो को ये बात रास नही आयी और इस वजह से सोनिया गांधी को प्रतिरोध भी झेलना पड़ा मगर सोनिया गांधी कहती है कि उन्होंने तो वही किया जो उनके दिल ने कहा.

खैर जो भी है अभी हाल ही में वही नीलिमा जेल से पेरोल पर बाहर निकली है क्योंकि उसकी बेटी की शादी है. नीलिमा को एक महीने के लिए जेल से पेरोल मिला है लेकिन उसे तीस दिन पूरे होते ही दुबारा से सरेंडर करना होगा. नीलिमा की बेटी इन दिनों यूके में पढ़ाई करती है और वो सोनिया गांधी का कई बार धन्यवाद भी करती है कि उन्होंने उनकी माँ को फ़ासी से बचा लिया.