जेल से बाहर क्यों आ रही है राजीव गांधी पर हमला कर जान लेने वाली महिला?

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देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जो गांधी परिवार की राजनीतिक परम्परा को आगे बढ़ाते हुए देश के प्रधानमंत्री बने. इस दौरान उन्होंने कुछ ठीक काम किये तो कुछ उन पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे लेकिन उनके जीवन का अंत बेहद ही दुखद हुआ. राजीव गांधी उस वक्त लोगो से मिलने के लिए भीड़ में पहुंचे थे जहाँ पर उनका माल्यार्पण हो रहा था और तभी एक धमाका हुआ जिसमे राजीव गांधी समेत कई लोगो की जान चली गयी. कई वक्त तक तफ्तीश हुई और उसमें कई लोगो को गिरफ्तार किया गया जिसमे से एक थी नलिनी.

नलिनी को पहले तो फ़ासी की सजा दी गयी थी लेकिन नलिनी की एक छोटी सी बच्ची भी थी जिसे देखते हुए सोनिया गांधी ने खुद ही कोर्ट से दरख्वास्त कर दी कि सजा कम कर दी जाये. इसके बाद नलिनी को उम्रकैद की सजा दी गयी. नलिनी की एक बेटी थी जिसे उसके रिश्तेदारों ने ही बड़ा किया है और अब इतने सालो के बाद में खबर आयी है कि नलिनी की बेटी की शादी है.

बेटी की शादी में शामिल होने के लिये नलिनी ने 6 महीने के लिये पेरोल माँगा था. पेरोल पर कोई भी कैदी कुछ समय के लिए अपने जीवन के जरूरी कार्यो को निपटाने के लिए जेल से बाहर जा सकता है और कोर्ट ने सरकारी वकील द्वारा गंभीर आपत्ति न जताए जाने पर नलिनी की 1 महीने की पेरोल की मंजूरी दे दी है. हालांकि कोर्ट ने ये भी कहा है कि ये जिम्मेदारी सरकार की रहेगी कि नलिनी को सुरक्षा वही दे क्योंकि वो खुद इसमें सक्षम नही है कि अपने लिए सुरक्षा गार्ड्स का इन्तजाम कर सके.

कोर्ट ने साथ ही साथ में नलिनी को ये भी सख्त हिदायत दी है कि पेरोल के समय में वो किसी भी संगठन से, राजनीतिक पार्टी से या फिर मीडिया से न तो मिल सकती है और न ही बात कर सकती है. जैसे ही 30 दिन पूरे होते है तो नलिनी को वापिस जेल में आकर के सरेंडर करना होगा. ऐसा न करने की स्थिति में उसके खिलाफ कार्यवाही हो सकती है.