कर्नाटक में कांग्रेस को बड़ा झटका, संकट में मुख्यमंत्री कुमार स्वामी की सरकार

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कांग्रेस कई राज्यों में बहुत ही भारी अल्पमत से जुडी समस्याओं का सामना कर रही है और इस जुडी में एक और राज्य का नाम जुड़ गया है जो है कर्नाटक. पहले तो ये जान लीजिये कि कर्नाटक में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने के बाद भी सरकार बनाने में समर्थ नही है क्योंकि कांग्रेस और जेडीएस ने भाजपा को रोकने के लिए आपस में गठबंधन किया मगर अब यहाँ पर इस्तीफा देने का ऐसा दौर शुरू हो गया है जिसे रोक पाना अपने आप में लगभग असंभव सा हो गया है और सरकार गिरने के करीब आ गयी है.

कुल 8 विधायक इस्तीफा देने स्पीकर के पास पहुंचे
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार आज कांग्रेस के 5 से 6 और जेडीएस के 2 से 3 विधायक इस्तीफा सौंपने के लिए विधानसभा स्पीकर के पास पहुंचे है. इस्तीफा देने वाले विधायको की कुल संख्या 8 है और इनका कहना है कि वैचारिक मतभेद के चलते ये पार्टी में नही रहना चाह रहे है. हालांकि स्पीकर उन्हें अभी तक मिले नही है तो सभी के सभी विधायक उनका कमरे में बैठकर के इन्तजार कर रहे है. जैसे ही स्पीकर कमरे में पहुँचते है विधायक उन्हें अपना इस्तीफा सौंपेंगे और अलग हो जायेंगे.

क्या कहता है इस्तीफे के बाद सत्ता का गणित?
फ़िलहाल कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी सबसे अधिक सीटो वाली पार्टी है जिसके पास में 105 विधायक है जबकि कांग्रेस का 79 और जेडीएस का 37 सीटो पर कब्जा है. इसके अलावा अन्य के पास में भी तीन सीट्स मौजूद है. ये 224 सीट्स वाली विधानसभा है जिसमे बहुमत के लिए 113 सीट्स की जरूरत है. अभी कांग्रेस और जेडीएस के पास मिलाकर 116 सीट्स है लेकिन अगर 8 विधायक इस्तीफ़ा दे देते है तो उनके पास सिर्फ 108 सीट ही रह जायेगी जो बहुमत के आंकड़े से दूर है और ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री कुमार स्वामी के पास में अल्पमत में होने के कारण सरकार चलाने का कोई भी अधिकार नही बचेगा.

ऐसे में क्या हो सकता है बीजेपी का प्लान?
अगर 8 विधायक इस्तीफ़ा देते है तो फिर वो बीजेपी में शामिल होकर के सरकार तो शायद ही बना पायेंगे क्योंकि 113 का आंकड़ा तो मिल सकता है लेकिन इससे दलबदल क़ानून की तलवार भी लटकेगी. अब संभव है कि वो बीजेपी में शामिल हो या फिर ये भी संभव है कि सरकार के अल्पमत में होने के कारण उसे बर्खास्त कर दिया जाए. अब जनता दुबारा जब चुनेगी तो पहले चुनाव होने के कारण उन लोगो को दुबारा नही चुनेगी और बीजेपी के वोट्स में इससे इजाफा होगा और सत्ता मिलने की समभावना बढ़ जायेगी.