मोदी सरकार ने योगी आदित्यनाथ को ही दे दिया बड़ा झटका

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अपने प्रदेश में कार्य में लगे हुए है. उन्होंने सरकारी अफसरों के लिए भी नियम काफी सख्त किये है और सामजिक ताने बाने से जुड़े हुए फैसले भी वो प्रदेश में लगातार एक के बाद एक लिये जा रहे है लेकिन अभी हाल ही में उन्होने ऐसा कुछ फैसला लिया है जो आरक्षण से जुड़ा है और खुद मोदी सरकार भी उनसे इस मामले में सहमत नही है. हालांकि फैसले पर सहमत हो न हो लेकिन प्रोसेस पर असहमत जरुर है. तो चलिए फिर आपको पूरी जानकारी भी दिये ही देते है कि योगी आदित्यनाथ किस दुविधा में फंस गये है?

17 जातियों को दिया अनुसूचित जाति का दर्जा
दरअसल योगी आदित्यनाथ ने यूपी में आरक्षण की व्यवस्था को पूरी तरह से बदलकर के रख दिया है. उन्होंने कुल 17 जातियां जिन्हें पहले ओबीसी का दर्जा प्राप्त था उन्हें अनुसूचित जातियों में शामिल कर दिया है. इस लिस्ट में राजभर, निषाद, कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, प्रजापति, धीमर, जाही मछुआ और अन्य जातियों का नाम है जो उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले के बाद में राज्य में अनुसूचित जाति के दर्ज में डाल दी गयी है मगर इस बात पर बहुत ही तेजी के साथ में ओब्जेक्शन उठने लगे है.

बसपा ने ठहराया गलत और बीजेपी में भी मान ली बात
राज्य सभा में बसपा की तरफ से मुद्दा उठाया गया कि कोई भी मुख्यमंत्री ऐसे ही राज्य में आरक्षण के कोटे से छेड़छाड़ नही कर सकता है इसके लिए संसद से बिल पास करवाना होगा. राज्यसभा में बीजेपी के नेता थावरचंद गहलोत ने भी इस बात को सही माना और कहा वो इस सम्बन्ध में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखेंगे. इसके बाद में साफ़ हो जाता है कि बीजेपी भी योगी जी के फैसले को गलत ठहराते हुए इस फैसले को लगभग वापिस ही लेने की बात कहेगी.

योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार के लिए ये बड़ा झटका है क्योंकि अगर ऐसा होता है तो एक तरफ तो योगी आदित्यनाथ के लिए ये काफी ग्लानी भरा पल होगा जब वो कुछ बोलकर के भी नही कर पा रहे है और ऊपर से 17 जातियों का बीजेपी के केन्द्रीय नेतृत्व से मोहभंग हो सकता है. हालांकि इस सम्बन्ध में कानूनी दांवपेच क्या हो सकते है? इस सम्बन्ध में तो भविष्य में ही मालूम चल पायेगा.