जन्मदिन स्पेशल: विदेश से पढकर लौटे और पिता से पार्टी छीनी, बुआ से खाया धोखा

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1 जुलाई को अखिलेश यादव 48 साल के हो गये है यानी उन्होंने अपनी जिन्दगी का आधा वक्त तो काट ही लिया है. इस दौरान वो विदेशो में पढ़े, देश में राजनीति की, मुख्यमंत्री बने और सूबा काबू करने की जद्दोजेहद में काफी वक्त जूझते भी रहे लेकिन आखिर में गलत फैसलों के चलते राजनीति से बाहर धकेल दिए गये. तो आखिर हकीकत में कौन है अखिलेश यादव? अखिलेश मने टीपू. घर पर उन्हें इसी नाम से बुलाया जाता था और शायद वो टीपू की तरह कुछ वक्त यूपी के राजा रहे भी मगर उनका सूरज ज्यादा वक्त तक जगमग रह नही सका.

पढ़ाई और बचपन
पिता मुलायम सिंह बड़े राजनेता थे तो बचपन काफी शौक मौज के साथ में बीता. राजस्थान के धौलपुर से स्कूली शिक्षा पूरी की और इसके बाद मैसूर में ग्रेजुशन पूरा करने के लिए चले गये और इसके बाद में अखिलेश ने यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी से आगे की पढ़ाई पूरी की जो ऑस्ट्रेलिया की बहुत ही बड़ी और जानी मानी यूनिवर्सिटी है. पढाई के बाद भी वो कुछ वक्त विदेश ही रहे और फिर राजनीति करने के इरादे से भारत लौट आये.

पिता की विरासत से शुरू की सियासत
मुलायम के बेटे है यही सोचकर पार्टी ने उन्हें विधानसभा उपचुनाव में फिरोजाबाद सीट से उतारा और अच्छे खासे मतों से उन्होंने बसपा प्रत्याशी को धूल चटायी और यही से उनका राजनीतिक उदय शुरू हुआ. अगला चुनाव उन्होंने कन्नोज विधानसभा सीट से लड़ा और वो भी जीत गये. चुनाव जीतने के बाद में वो सूबे के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री सन 2012 में बने. मुख्यमंत्री पद के दौरान एक्सप्रेसवे समेत कई काम है जिसके लिए उनकी तारीफ़ की जाती है मगर उनके कार्यकाल के दौरान कुछ एक भ्रष्टाचार हुए, जातिवाद के आरोप लगे जिसके चलते उन्हें सत्ता भी आगे चलकर के गँवानी पड़ी.

पिता को दरकिनार किया और बुआ से भी धोखा मिला
ये वो दौर था जब सपा अपने बुरे दौर से गुजर रही थी जहाँ न विधानसभा में पर्याप्त सीट्स थी और न ही लोकसभा में. पिता को उस वक्त उन्होंने जोर देकर के पार्टी से अलग थलग किया और मुलायम की सपा अब अखिलेश की सपा हो गयी. चाचा शिवपाल को अधिकार न मिलने के चलते वो पार्टी से अलग हो गये और अपना अलग ही दल बनाया. पिता चाचा से अलग हुए तो फिर 2019 के लोकसभा चुनावों में बुआ यानी मायावती का दामन थामा जिसमे भी फेल हुए. चुनाव हारे और बसपा सपा में झगडे शुरू हुए मायावती ने अखिलेश पर हर का ठीकरा फोड़ा और अखिलेश दुबारा पिता के पास लौटे.

अखिलेश यादव की सम्पति की बात करे तो उनके पास इकनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कुल 24.8 करोड़ रूपये की सम्पति है और उनकी पत्नी डिम्पल यादव खुद भी एक सांसद है. शुरू में उनकी निजी जिन्दगी में खटपट को लेकर के भी अफवाहे जोर पकडती रही लेकिन बाद में सब कुछ महज हवा ही साबित हुई. अब 48 की इस उम्र में अपने पिता के तजुर्बे की मदद से सत्ता के हाशिये पर धकेल दी गयी समाजवादी पार्टी को दुबारा से जीवित करने की कोशिश में लगे हुए है.