5 बड़े बयानों में मायावती ने खोली अखिलेश की पोल, इसके बाद अखिलेश कर रहे होंगे गठबंधन करने पर अफ़सोस

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बीजेपी को रोकने के लिए जिस तरह से मायावती और अखिलेश बुआ बबुआ की जोड़ी बनकर के सामने आये थे वो अपने आप में सभी को हैरान करने वाला था लेकिन ये गठबंधन ज्यादा वक्त तक टिका नही और जैसे ही सपा बसपा हारी तो न सिर्फ दोनों पार्टियां अलग हो गयी बल्कि साथ ही साथ में एक दुसरे पर उलटे सीधे बयान भी दिए जाने लगे है. ये अपने आप में काफी सोचनीय दशा है. पहले भी मायावती अखिलेश पर हार का इल्जाम डाल चुकी है लेकिन अब ये वार बढती चली जा रही है.

हाल ही में मायावती ने उपचुनाव को लेकर बसपा की एक अहम् बैठक आयोजित की थी जिसमे आने वाले उपचुनावों पर चर्चा होने वाली थी मगर मायावती ने वहाँ पर ज्यादातर वक्त अखिलेश और उसकी पार्टी को कोसने में लगाया जिसमे ये बाते कही गयी है.

  1. अखिलेश यादव ने तो मुझे हारने के बाद में फोन तक नही किया. सतीश मिश्रा ने उन्हें फोन करके कहा कि वो मुझे फोन करे लेकिन तब भी नही किया और इसके बाद मेने खुद बड़े होने का कर्तव्य निभाया और अखिलेश को फोन किया.
  2. मेने जब तीन जून को गठबंधन तोड़ना चाहा तब भी अखिलेश ने मुझसे बात तक नही की और सिर्फ सतीश मिश्रा से ही बात करते रहे.
  3. अखिलेश ने मुझे ये तक सन्देश भिजवाया था कि मैं मुस्लिमो को टिकट न दूं क्योंकि इससे वोटो का ध्रुवीकरण होगा, लेकिन मेने उनकी इस बात को नही माना और तो और मेने मुस्लिमो को भी टिकट दिया.
  4. मुलायम सिंह यादव और बीजेपी दोनों ने मिलकर के मुझे ताज कोरिडोर में फंसाया. अखिलेश यादव की सरकार में तो गैर यादवो के साथ भी नाइंसाफी की गयी थी.
  5. समाजवादी पार्टी आरक्षण का विरोध प्रमोशन में करती रही जिसके चलते उन्हें दलितों और और पिछडो का वोट नही मिला.

जिस तरह से मायावती लगातार अखिलेश यादव पर निशाने साध रही है और गठबंधन के दौरान उनके बीच में जो भी हुआ उसे बाहर ला रही है उसके बाद में अखिलेश यादव का भरोसा कभी न जुड़ने के स्तर तक टूट चुका होगा.