मोदी सरकार ने कहा हिंदुस्तान पर आजादी के बाद का सबसे बड़ा खतरा आ रहा है

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भारत पिछले काफी लम्बे समय से या फिर यूँ कहिये पिछली शताब्दियों से ही भारत खतरे झेलते आ रहा है और अब तो इसकी मानो आदत सी ही लग गयी है लेकिन इस बार जो परेशानी हिन्दुस्तान झेलने जा रहा है वो वाकई में बड़ी समस्या है क्योंकि आपके गले को सूखा देने वाला है, आपके नहाने में दिक्कत परेशानी करने वाला है, भारतीयों को प्यास से परेशान कर देने वाला है. मोदी जी के आयोग ने कहा है भारत में अब तक का सबसे बड़ा सूखा पड़ने जा रहा है.

क्या कहती है नीति आयोग की रिपोर्ट?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाले नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भारत का अधिकतर ग्राउंड वाटर या तो सूख चुका है या फिर उसका लेवल हद से नीचे गिर चुका है. इसका परिणाम ये होगा कि आने वाले 10 वर्षो में यानि लगभग 2030 तक भारत की 40 प्रतिशत आबादी को पीने का पानी तक नसीब नही होगा. इससे भारत की जीडीपी भी 6 प्रतिशत तक गिर जायेगी. लोग प्यास से तरसेंगे जिसमे दिल्ली, हैदराबाद जैसे बड़े बड़े शहर शामिल है.

क्या है ऐसे हालत बनने के पीछे के कारण?
पानी के अति उपयोग ने ही पानी की किल्लत पैदा कर दी है. बढती जनसँख्या को जरूरत से ज्यादा पानी की जरूरत है और भारत की जनसँख्या जल्द ही 160 करोड़ को छूने वाली है जिसका वाटर कंज्पशन पिछले 20 साल के मुकाबले कई गुना ज्यादा है. उद्योगों ने भी पानी को गन्दा करने में कोई कसर नही छोड़ी है. ग्राउंड लेवल वाटर के आलावा नदियाँ भी पीने लायक नही बची है जिसके चलते खेती से लेकर पीने के पानी के भी लाले पड़ने वाले है.

पर्यावरण वैज्ञानिकों ने सुझाये उपाय
पर्यावरणविद इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहते है हमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर काम करना होगा. यानि बरसात में जो पानी बरसता है उसे स्टोर करना और उसके जरिये भूतल का जल स्तर बढ़ाना होगा. गंगा, यमुना और नर्मदा जैसी नदियों को साफ करने का प्रयास करना होगा. उद्योग धंधो में इस्तेमाल होने वाले पानी का पूर्ण शुद्धिकरण करके उन्हें दुबारा रनिंग वाटर में पहुंचाना होगा. लोगो को अपनी डेली की पानी बर्बाद करने वाली आदतों में सुधार लाना होगा.

अगर ऐसा नही हुआ तो भारत बन जायेगा केपटाउन
अफ्रीका की राजधानी में 2018 में ही पानी खत्म हो चुका था. तब पानी राशन की तरह बांटा जाता था जहाँ प्रति व्यक्ति सिर्फ 50 लीटर पानी बाँटा जाता था. अगर भारत में इसी तरह पानी कम होता रहा तो आने वाले समय में 21 से भी ज्यादा शहर केपटाउन के हालात तक पहुँच जायेंगे.