बिहार में चमकी बुखार पर बोली स्मृति ईरानी, काफी संवेदनशील बाते कही है

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बिहार में इन दिनों मेडिकल इमरजेंसी जैसे हालात बन चुके है. राज्य के कई इलाको में लगातार चमकी बुखार के केस देखने में आ रहे है जो अमूमन छोटे बच्चो में ही होते है और पर्याप्त मेडिकल सुविधाए और रिसर्च न होने की वजह से 100 से भी ज्यादा बच्चो की जान जा चुकी है. राज्य सरकार इसे रोकने में पूरी तरह से विफल नजर आ रही है और अस्पताल प्रशासन के पास में भी उतने संसाधन नही है कि सब कुछ जादू की तरह ठीक कर सके.

हालांकि डॉक्टर अपने आप में एक जादूगर होता है मगर बिना संसाधन के वो भी करे तो क्या करे? खैर इन सबके बीच में संसद में भी चमकी बुखार का मामला उठा और स्मृति ईरानी ने इस पर काफी बड़ी बात कही है. ये बात उन्होंने तब कही जब सदन में चमकी बुखार का मुद्दा जोर शोर से उठाया गया.

संसद में खड़े होकर चमकी बुखार के मुद्दे पर स्मृति ईरानी ने कहा ‘ ये मानवता से जुडा हुआ सवाल है. मैं भी एक माँ हूँ और उन माओ पर क्या गुजरती होगी? इस दर्द को मैं बड़े अच्छे से समझ सकती हूँ. इसमें कितना दुःख है ये मुझे महसूस होता है. ये मुद्दा सिर्फ बिहार का नही बल्कि पूरे देश का है जहाँ पर कुपोषण और गंदगी के चलते इस तरह की बीमारियाँ खड़ी होती है और जान जाती है. हमें हाथ धोने, सफाई रखने और साफ़ पानी का पानी पहुंचाने जैसी बुनियादी जरूरतो पर काम करना होगा.’

जहाँ पूरी संसद में इस मुद्दे पर काफी हो हल्ला मचा हुआ दिखाई पड़ा वही दूसरी तरफ स्मृति ईरानी की संवेदनशील बातो में इस पूरे मसले का हल दिखाई देने लगा लेकिन समस्या ये है कि सदन में इन बातो को बोल पाना बेहद ही आसान है लेकिन इन चीजो को समाज में इम्प्लीमेंट कर पाना अपने आप में एक बेहद ही बड़ी चुनौती है और ये कब तक पूरी होगी? इस बारे में कोई भी नही जानता है.