जन्मदिन स्पेशल: लन्दन में बड़े पद पर नौकरी कर रहे होते राहुल गांधी लेकिन जबरदस्ती करनी पड़ी राजनीति

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कांग्रेस के युवराज के तौर पर जाने जाने वाले राहुल गांधी जिनका आज जन्मदिन है. राहुल को जीते हुए 48 साल से ज्यादा हो चले है लेकिन दुर्भाग्य से वो कभी अपनी जिन्दगी को जी ही नही सके. शुरू में उन्हें अपनी जिन्दगी डर को समर्पित करनी पड़ी, फिर प्रेशर को और आखिर में पारिवारिक महत्त्वकांक्षाओ को. आज राहुल कांग्रेस अध्यक्ष न होते तो क्या होते? क्या कर रहे होते? चलिये जानते है उनकी जिन्दगी से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य जो शायद आपको उनके जन्मदिन पर असली राहुल से मिलवाने में मदद करे.

बार बार डिस्टर्ब होती रही पढ़ाई
राहुल ने दून की बोर्डिंग स्कूल में अपनी पढ़ाई की लेकिन तभी दादी इंदिरा गांधी चल बसी. इसके बाद सुरक्षा कारणों से उन्हें दिल्ली में पढ़ना पड़ा. आगे की पढ़ाई भी फिर दिल्ली के ही सेंट स्टीफन कॉलेज से हुई. फिर अमेरिका में हॉवर्ड में पढने के लिए भेज दिया गया हालाँकि सुरक्षा कारणों से यहाँ भी उन्हें समझौता करना पडा और फ्लोरिडा जाना पडा. पिता के देहांत की खबर ने उन्हें एक बार फिर से तोड़ दिया.

लन्दन में करते थे मजे से नौकरी
राहुल गांधी लन्दन ने मेनेजमेंट कंसल्टिंग फर्म में अपनी पहचान छुपाकर के नौकरी की. यहाँ पर वो रौल विंसी बनकर के काम किया करते थे. मुंबई आये तो वहाँ पर भी उन्होंने बिजनेस ज्वाइन कर लिया. उनके पास बिजनेस मेनेजमेंट और इकोनॉमिक्स का अच्छा ज्ञान था तो वो उसकी मदद से वो अच्छी खासी नौकरी कर रहे थे और उन्होंने अपनी स्किल के आधार पर काम चुन भी लिया.

अचानक थोपी गयी राजनीति 
राहुल गांधी अपनी मॉडर्न लाइफस्टाइल में बड़े मस्त थे लेकिन पारिवारिक और माँ की महत्वकांक्षाए अचानक उनपर थोप दी गयी. उन्हें कांग्रेस में बड़ा पद दिया गया. अमेठी से 2004 में चुनाव लडवाया गया और लगातार पीएम पद के लिए प्रोजेक्ट किया गया. 2014 आते उन्हें उम्मीदवार बना भी दिया गया लेकिन राजनीति में उनका हाथ साफ़ न होने के कारण वो पप्पू और रागा जैसे नामो से मशहूर हुए, ट्रोल हुए और जनता ने उन्हें खारिच कर दिया. राहुल गांधी की अध्यक्षता में पार्टी ने एक बार फिर से चुनाव लड़ा लेकिन न सिर्फ पार्टी हारी बल्कि राहुल भी अपनी अमेठी की सीट खो बैठे. जिसके बाद उन्होंने अध्यक्षता छोड़ने के लिये जिद की लेकिन उन्हें छोड़ने नही दी.

इमोशनल ड्रामा की शिकार हुई राहुल की जिन्दगी
राहुल के पास लन्दन में नौकरी थी, वो न थी तो बड़ी बड़ी डिग्री और मुंबई में वो अपना काम सेटल कर रहे थे लेकिन उन्हें दादा दादी और पिता के नाम पर राजनीति में आना ही पडा मगर अनिच्छा से आने की वजह से न सिर्फ उनकी जिन्दगी को नुकसान हुआ बल्कि पार्टी भी तार तार हो गयी.