चलिये जानते है एक देश एक चुनाव से हमें क्या क्या फायदे होंगे?

157

फिलहाल पीएम मोदी और भारतीय जनता पार्टी एक नया चुनावी नारा लेकर के आये है और वो है ‘एक देश एक चुनाव’. पीएम बात करते है पूरे देश में सारे विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक साथ करवाये जाये इससे धन और समय की बचत होगी. इलेक्शन कमीशन को भी कम मेहनत करनी पड़ेगी और इसे लेकर के पीएम ने एक सर्वदलीय बैठक भी बुलायी थी जिसमे कुछ एक नेता पहुंचे जबकि केजरीवाल, ममता और मायावती जैसे बड़े बड़े क्षेत्रीय नेताओं ने इसका बहिष्कार कर दिया. चलिये फिर हम जानते है एक देश एक चुनाव से देश को भला क्या फायदा होने वाला है?

बचेगा पैसा 
लोकसभा चुनाव करवाने में इलेक्शन कमीशन को हजारो करोडो रूपये व्यय करना पड़ता है. इसके अतिरिक्त जब 28 राज्यों में चुनाव होते है तब भी खर्च बहुत भारी मात्रा में होता है. हर बार नया सेट अप और कर्मचारियों को लगाना आदि सब कुछ करने पर खर्च कई गुना बढ़ जाता है. एक अनुमान के मुताबिक अगर ये सारे चुनाव साथ करवाए जाए तो 5500 करोड़ रूपये तक बच सकते है.

बच जायेगा खूब सारा वक्त
जब आम और विधानसभा चुनाव अलग होते है तो ऐसे में एक चुनाव को करवाने में कम से कम एक से डेढ़ महीना लग जाता है जबकि इसकी तैयारियां कई महीनो पहले शुरू हो जाती है जिसमे सरकारी कर्मचारी ही घिसते है. अगर विधानसभा के चुनाव लोकसभा चुनावो के साथ होते है तो उनमे व्यर्थ होने वाला समय किसी और जगह उपयोग में लिया जा सकेगा.

विकास कार्यो की बाधा दूर होगी
चुनावों के समय किसी योजना को नही लाया जा सकता न ही केंद्र उस राज्य में ले जा सकता है अगर चुनावी मौसम हो. इतना ही नही कई बार योजनाये या प्रोजेक्ट बनकर के तैयार हो जाते है लेकिन उन्हें राज्य में शुरू नही किया जा सकता है क्योंकि चुनाव है. ऐसे में कई ऐसे काम है जो आचार सहिंता जैसी चीजो की महीनो तक भेंट चढ़े रहते है. ये सब सिमट जायेगा.

राज्य और केंद्र का तालमेल बढेगा
अगर केंद्र और राज्य के एक साथ चुनाव होंगे तो राज्य और केंद्र समझेंगे कि हमें 5 साल इन्ही के साथ रहना है जबकि अब कभी केंद्र की सरकार आती है तो कभी राज्य की और ऐसे केंद्र राज्य की आपस में पार्टियां भी बदलती रहती है तो सामंजस्य नही बैठ पाता है.

स्थिरता रहेगी बरकरार
अक्सर जब केंद्र में सरकार बदलती है तो वो अपनी विपरीत पार्टी के शासन वाले राज्यों को पैसा देने में या सुविधा देने में आनाकानी करती है और कई बार राज्य सरकारे भी केंद्र में विपक्षी होने पर उनकी योजनाये रोक देती है और वो इस उम्मीद में रहते है कि अभी कुछ वक्त में केंद्र में या राज्य में उनकी पार्टी आ जायेगी. इस उठापटक में जनता का काफी नुकसान होता है जो इसके बाद शायद न हो.