क्या है चमकी बुखार जिसने बिहार में 100 से ज्यादा बच्चो की जान ले ली?

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बिहार इन दिनों काफी ज्यादा परेशान है क्योंकि एक महामारी जो जून के महीने में बड़ी ही तेजी के साथ फेल रही है और उसे सामान्य भाषा में कहा जाता है चमकी बुखार. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस बुखार के चलते कुछ ही दिनों में 100 के करीब बच्चो ने दम तोड़ दिया और उनके परिजन कुछ भी नही कर पाए. सरकारे हाथ पर हाथ धरी बैठी रही और ऐसे में कही न कही सवाल उठ रहा है कि आखिर ये चमकी बुखार चीज क्या है जिसे परिवार और सरकार मिलकर के भी नही रोक पा रहे है?

गर्मी और बुखार का मिश्रण है चमकी बुखार
इसे वैज्ञानिक भाषा में एक्यूट एन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम कहा जाता है जो अधिकतर छोटे बच्चो में ही देखने में आता है. जब कोई मानव शरीर कुपोषित हो, उसमे रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो और वो गंदगी में रह रहा हो तो उसे बुखार होता है और जून जैसे महीने में जब वही शरीर तेज तापमान के संपर्क में आता है तो वो इस बीमारी की चपेट में आ जाता है. इसमें शरीर में एंठन होती है और महसूस होना तक बंद हो जाता है.

कैसे बच सकते है?
फ़िलहाल इसका कोई भी सटीक इलाज मेडिकल विज्ञान के पास में मौजूद नही है लेकिन इससे बचे रहने के लिये सौ तरह के तरीके है. गर्मियों में ठंडा न उपलब्ध हो तो सामान्य पानी ही खूब पिये, धूप में न निकले, आस पास गंदगी न पनपने दे और पौष्टिक भोजन का सेवन करे. कम सम्पति वाले लोग दही, छाछ और नीम्बू जैसी चीजो का उपयोग कर सकते है. बच्चो को धूप में खेलने से रोके और कोशिश करे वो बाहर जाने ही न पाये.

अभी की नही बहुत पुरानी है ये बीमारी चमकी बुखार
अभी की नही बल्कि बहुत पहले की समस्या है इससे 2018 में 7 जाने गयी थी जबकि 2012 में सबसे अधिक 120 जाने चली गयी लेकिन अफ़सोस सरकार द्वारा पोषण, स्वास्थ्य और गंदगी को लेकर के ऐसे कोई भी कदम नही उठाये गये है जिससे इस बीमारी को रोका जा सके.