इन 4 लोगो ने मायावती पर किया भरोसा, चारो को धोखा देने के आरोप लगे

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मायावती यानि उत्तर प्रदेश नामक सूबे की सबसे ताकतवर महिला नेता जिन्होंने कभी वहाँ की सत्ता की कमान भी संभाली है लेकिन मायावती की जिन्दगी से जुड़े विवाद भी कुछ कम नही है. सबसे बड़ी दलित नेता के तौर पर देश में उभरी मायावती की जिन्दगी को ऊपर उठाने में या फिर उनकी जिन्दगी में 4 लोगो का बड़ा योगदान रहा है लेकिन जाते जाते उन्होंने या फिर बादमें उनके सगे संबंधियों ने मायावती पर ही उल्टे सीधे आरोप मढ़े है और इस बात को कत्तई झुठलाया नही जा सकता है.

काशीराम

काशीराम वही नाम है जिन्होंने मायावती को बसपा की कमान सौंपी और एक छोटी सी कार्यकर्ता को इतना बड़ा साम्राज्य दे दिया लेकिन काशीराम के परिवारजन मानते है ये उनकी सबसे बड़ी गलती थी. सन 2014 में काशीराम की बहन और उनके परिजनों ने उनके निधन के पीछे का कारण मायावती को बताया और ये भी कहा कि जब तक मायावती बसपा की हेड बनी रहेगी तब तक वो बसपा को वोट नही देंगे.

मुलायम सिंह यादव

1995 से पहले सपा और बसपा में ऐसी तल्खियाँ नही थी बल्कि सब कुछ ठीक चल रहा था और सपा बसपा दोनों मिलकर सरकार चला रहे थे जिसमे मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे. एक दिन मुलायम सिंह को सूचना मिलती है कि मायावती उनसे सत्ता हथियाकर यूपी में खुद मुख्यमंत्री बनने चली है और इससे तिलमिलाकर गेस्ट हाउस काण्ड हुआ. इसके बाद मुलायम सिंह की काफी बेइज्जती हुई और उन्हें सीएम पद से हाथ भी धोना पड़ा.

ब्रह्मदत्त द्विवेदी

आरएसएस के मेंबर और बीजेपी के काफी अच्छे जाने माने नेता वही व्यक्ति थे. जब मायावती के साथ गेस्ट हाउस काण्ड हुआ था तब वो वही पर थे और उन्होंने ही मायावती को बचाया भी था और समाजवादियो से शत्रुता ले ली. इसके बाद 1997 में एक समाजवादी ने ही उनकी जान ले ली. ब्रह्मदत्त द्विवेदी के बेटे ने मायावती पर आरोप भी लगाये है कि जब उन्होंने फिर से उस सपा का हाथ थामा तो उन्होंने उनके पिता के एहसान को भुला दिया. वो इसे एक धोखे की तरह लेते है.

अखिलेश यादव

बीजेपी को रोकने के लिए अखिलेश और मायावती का गठबंधन हुआ और इस गठबंधन के लिए अखिलेश अपने पूरे परिवार से लड़ गये. मायावती को अपनी बुआ बनाया लेकिन चुनाव खत्म होते ही जब सपा को कम और बसपा को ज्यादा सीटे मिली तो मायावती ने अखिलेश से रास्ते अलग कर लिये और ये गठबंधन खत्म होने का संकेत था. यही नही मायावती ने तो ये तक इल्जाम लगा दिया कि चुनाव हारने का कारण भी अखिलेश यादव ही थे.