अखिलेश यादव को मिला धोखा, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मायावती ने कही ये बाते

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बीजेपी के उत्तर प्रदेश में बढ़ते हुए प्रभाव को रोकने के लिये अखिलेश यादव और मायावती ने गठबंधन किया था और लगा था ये बीजेपी को टक्कर देगा लेकिन ऐसा बिलकुल भी नही हुआ और दोनों ही पार्टियां बेहद ही कम सीटो पर सिमटकर रह गयी. इसके बाद कल से ही ये कयास लगने लग गये थे कि अब ये गठबंधन टूट सकता है. 3 जून को मायावती ने एक मीटिंग दिल्ली में बुलाई गयी जिसमे अखिलेश यादव के खिलाफ बाते हुई और आखिरकार मायावती ने अगले दिन यानि 4 जून को प्रेस वार्ता करके इसकी पूरी जानकारी दी है.

मायावती ने प्रेस वार्ता में अखिलेश और उनकी पार्टी पर ही हार का पूरा ठीकरा फोड़ दिया है. मायावती ने उनकी तरफ से न वोट आने का न ही कार्यकर्ताओं द्वारा मदद किये जाने के आरोप लगाये है जो अखिलेश यादव के राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी त्रासदी हो सकती है. ये है मायावती की कही हुई कुछ बाते.

  1. अखिलेश और डिम्पल मेरा बहुत सम्मान करते है, हमारे बीच में पारिवारिक रिश्ते बने रहेंगे. सुख दुःख में
  2. राजनीतिक विवशता को भी नजरअंदाज नही किया जा सकता है.
  3. सपा के बेस वोट यानि यादवो ने खुद ही उन्हें वोट नही किया है. अगर सपा खुद अपने उम्मीदवारो के लिए ही वोट नही जुटा पायी तो उन्होंने हमें वोट कैसे ट्रान्सफर किये होंगे? ये सोचने वाली बात है.
  4. अगर समाजवाद की हालत ऐसी ही रही तो हमारा अलग चलना ही बेहतर है. समाजवादी पार्टी में सुधार की जरूरत है.
  5. अखिलेश ने सपा में बदलाव किया तो साथ बने रह सकते है.
  6. हमने फैसला किया है कि आने वाले विधानसभा उपचुनाव हम अकेले ही लड़ेंगे.
  7.  डिम्पल यादव और रामगोपाल यादव जैसे बड़े नेताओं का हारना हमें फिर से सोचने पर मजबूर करता है.

इन बातो के बाद में एक बात साफ़ हो जाती है कि फ़िलहाल के लिए ये दोनों ही पार्टियां अलग हो चुकी है जैसा पीएम मोदी ने चुनाव से ठीक पहले कहा था कि इस गठबंधन की उम्र सिर्फ चुनाव के नतीजो तक है. हालांकि बीजेपी के ही नेता स्वामी प्रसाद मौर्य का कहना है कि अखिलेश ने ही बसपा को शून्य से दस पर लाकर खड़ा किया है जबकि बसपा का कहना है सपा से उन्हें कोई फायदा नही.