अब कांग्रेस ने हार के लिये बताया अखिलेश एंड मायावती पार्टी को जिम्मेदार

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चुनाव खत्म हो गये है और बीजेपी सरकार के कामकाज में जुट गयी है जबकि अब विपक्षी पार्टियों के लिए समय है चुनाव में हार की समीक्षा का और समझने का कि आखिर चुनाव में जनता ने उन्हे रिजेक्ट क्यों कर दिया? ऐसे में सभी पार्टियां अपना अपना मंथन कर रही है और सबसे बड़ा मंथन इसपर हो रहा है कि कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी आखिर अपनी ही सीट पर चुनाव कैसे हार गये? हालांकि उनके और स्मृति ईरानी के बीच जीत हार का अंतर बहुत बड़ा नही था लेकिन हार तो हार होती है और इस हार की समीक्षा के लिये दो सदस्यों की कमिटी बनाई गयी है.

कांग्रेस की इस कमिटी ने अपनी पहली रिपोर्ट में राहुल गांधी की इस करारी हार के लिये सपा और बसपा को जिम्मेदार बताया है. कांग्रेस पार्टी की तरफ से कहा गया है कि सपा और बसपा की तरफ से अमेठी में अपने उम्मीदवार तो नही उतारे गये लेकिन उनकी तरफ से कोई भी पर्याप्त सहयोग नही मिला है.

बसपा की तरफ से सन 2014 में अमेठी में अपना एक उम्मीदवार उतारा गया था जिसे कुल 50 हजार के करीब वोट मिले थे और अगर ये वोट कांग्रेस को ट्रान्सफर हो जाते तो राहुल गांधी के जीत जाने की संभावना बढ़ जाती. सपा और बसपा की तरफ से न तो अपने वोटर को न तो कांग्रेस की तरफ मोड़ा गया और न ही उनका कोई सहयोग रहा जिसके चलते उनका वोट भी बीजेपी को चला गया और उसी अंतर से स्मृति ईरानी जीती है.

ये हमारा नही बल्कि राहुल गांधी की पार्टी कांग्रेस का दावा है. अब इस पर सपा और बसपा की क्या प्रतिक्रिया रहती है? ये तो आने वाले समय में ही पता चलेगा मगर कोई सकारात्मक बात आने की बात नजर नही आती क्योंकि जिस तरह से कांग्रेस ने अपनी हार का ठीकरा सपा और बसपा के सर पर फोड़ दिया है वो जाहिर तौर पर अखिलेश और मायावती को नागवार गुजरने वाला है.