क्या होगा इन चुनावों के बाद अरविन्द केजरीवाल का भविष्य

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लोकसभा के चुनाव खत्म हुए और इसके एग्जिट पोल आने भी शुरू हो गये है. हर जगह एनडीए को बहुमत मिल भी रहा है लेकिन इस बार देश की नजर दिल्ली पर कुछ ज्यादा थी क्योंकि यहाँ पर त्रिकोणीय मुकाबला था. एक तरफ केंद्र में सत्ता पर बैठी बीजेपी, दूसरी तरफ दिल्ली में लम्बे वक्त तक सत्ता में रही कांग्रेस और तीसरी तरफ नयी नयी हाल ही में उभरी हुई ‘आम आदमी पार्टी’. आप ने भी दिल्ली की सातो लोकसभा सीटो पर अपने प्रत्याशी उतारे थे मगर अरविन्द केजरीवाल इन चुनावों पर बड़ा ही निराशात्मक बयान दे रहे है.

लगभग अधिकतर एग्जिट पोल्स में बीजेपी दिल्ली में बढ़त बनाते हुए नजर आ रही है जबकि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों ही एक दूसरे को कड़ी टक्कर दे रही है. ये चीज सबसे ज्यादा इफ़ेक्ट करने वाली है अरविन्द केजरीवाल को क्योंकि 1 साल के भीतर ही दिल्ली में विधानसभा चुनाव भी होने वाले है.

अगर केजरीवाल दिल्ली की लोकसभा सीट्स में अपना वोट शेयर खोते है तो इसका प्रभाव विधानसभा चुनावों में पड़ेगा. ऐसे में उनकी पहले की तरफ मजबूत सरकार बन पाना या फिर सरकार बन पाना भी संभव नही होगा क्योंकि इसके बाद अरविन्द दिल्ली के चुनावों में अपनी क्रेडिबलिटी खो देंगे. उन्होंने अपने सारे एमएलए, सारा फंड और सारी ताकत इस चुनाव में झोंक दी है जिसके चलते उनके पास पाने को काफी कुछ है तो खोने को सब कुछ है.

अरविन्द खुद मीडिया को ये बयान देते हुए नजर आये थे कि इन चुनावों में सारा मुस्लिम वोट कांग्रेस को शिफ्ट हो गया जो कि 13 प्रतिशत है. अगर ये बात सही साबित हुई तो विधानसभा में भी आप और कांग्रेस का वोट आपस में बंटेगा जिसका सीधा सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी को होगा और उनके विधायको की संख्या काफी ज्यादा बढ़ सकती है, अगर दिल्ली में आम आदमी पार्टी कम होती है तो केजरीवाल की बिसात न के बराबर होकर रह जायेगी.