इधर चुनाव खत्म, उधर मायावती ने अखिलेश की बेज्जती करनी शुरू की

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उत्तर प्रदेश इन दिनों भारत की राजनीति का केंद्र बना हुआ है क्योंकि लोकसभा के चुनाव चल रहे है और इस चुनाव की सबसे ज्यादा 80 सीट्स इसी राज्य से आती है और यहाँ पर दो सबसे बड़े विपक्षी चेहरे बनकर के उभरे है मायावती और अखिलेश यादव. भारतीय जनता पार्टी के विजय रथ को रोकने के मकसद से दोनों ही 25 साल से धुर विरोधी रही दोनों ही पार्टियों समाजवादी पार्टी और बसपा ने हाथ मिला लिया. अखिलेश यादव और कुमारी मायावती ने एक मंच साझा किये और दोनों ने मिलकर के ही अपने प्रत्याशी उतारे और दावा किया कि वो दोनों ही मिलकर भारतीय जनता पार्टी को कड़ी टक्कर दे रहे है.

सभी को ऐसा लगा कि दोनों ही दुश्मन रह चुकी ये पार्टियां आपस में अब दोस्त बन चुकी है लेकिन ऐसा हकीकत में नही है. इसका सबूत फ़िलहाल में ही मायावती ने अखिलेश यादव की घनघोर बेज्जती करके दे दिया. मायावती और अखिलेश यादव जब भदोही में प्रचार करने के लिए पहुँचे तो इशारों ही इशारों में मायावती ने अखिलेश यादव को एक नौसिखिया मुख्यमंत्री करार दे दिया.

मायावती ने कहा कि जब अखिलेश पहली बार मुख्यमंत्री बने तो उन्हें ब्यूरोक्रेसी ने नाच नचाया और वो नाचते ही रह गये. अब इसमें मायावती ने प्रत्यक्ष रूप से तो नही लेकिन परोक्ष रूप से अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने की योग्यता पर सवाल जरुर खड़े कर दिए है.

अखिलेश यादव की तरफ से इस पर कुछ भी कहा नही गया है मगर एक बात तो साफ है कि चुनाव के परिणामो के बाद में इन दोनों ही पार्टियों का एक साथ रह पाना बेहद ही मुश्किल नजर आता है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यही दावा करते है कि एक बार चुनाव निपटने के बाद में एक बार फिर से यही नेता जो एक दुसरे के साथ में खड़े दिखाई देते है वो एक दुसरे की टांग खींचते हुए दिखाई देंगे.