क्या राजीव गांधी सच में भ्रष्ट थे? पीएम मोदी के दावे की हकीकत

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन दिनों पूरे राजनीतिक फोम में है जहाँ वो किसी पर भी प्रहार करने से परहेज नही कर रहे है और इस बार उनके निशाने पर राजीव गांधी आ गये जो देश के प्रधानमंत्री भी रह चुके है. पीएम मोदी ने राजीव गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि वो मिस्टर क्लीन कहलाते थे लेकिन उंनका जीवन भ्रष्टाचारी नम्बर 1 के साथ समाप्त हुआ. नरेंद्र मोदी के इस बयान पर कांग्रेस ने घोर आपत्ति जताई और इसे राहुल और प्रियंका ने अपने पिता की शहादत का अपमान बताया. अब सवाल ये उठता है कि पीएम मोदी ने ऐसा क्यों कहा? इसके पीछे कुछ तो कारण रहा ही होगा, चलिए फिर जानते है राजीव गांधी मिस्टर क्लीन थे या फिर भ्रष्ट नम्बर वन?

राजीव गांधी के सत्ता में रहते हुए हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा आर्म्स डीलिंग में भ्रष्टाचार हुआ था जो काफी वक्त के बाद उजागर हुआ. इसमें स्पेशल होवित्जर बोफोर्स तोपे खरीदे जानी थी और इसमें मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राजीव गांधी और उनके करीबियों ने पूरा पूरा फायदा उठाया और लगभग 1.4 बिलियन डॉलर का घोटाला हुआ. ये उस समय का सबसे बड़ा घोटाला था और 90 के दशक में 1.4 बिलियन इतना ज्यादा पैसा हुआ करता था जिसकी कल्पना भी नही की जा सकती.

अगर राजीव गांधी की सरकार में इतना बड़ा आर्म्स डीलिंग में भ्रष्टाचार हुआ था, राष्ट्रीय सुरक्षा में समझौता हुआ था तो इसके जिम्मेदार भी वही ही कहे जायेंगे अब इससे उन्हें फायदा हुआ या फिर नही हुआ ये तो जांच का विषय है. राजीव गांधी खुद इस बात को क्लेम करते थे ‘ हम 1 रूपया भेजते है लेकिन जनता तक सिर्फ 10 पैसा ही पहुँचता है.’ राजीव गांधी का ये स्टेटमेंट ही उनके सरकार में और सिस्टम में हो रहे भ्रष्टाचार की पुष्टि करता है साथ ही साथ उस नाकामी को भी जाहिर करता है जो राजीव गांधी के नेतृत्व में थी.

व्यवस्था में करप्शन था लेकिन उसे ठीक करने की कोशिश नही की गयी जैसे मोदी सरकार में डायरेक्ट फंड ट्रान्सफर या बैंक ट्रांसफ़र के जरिये किया गया. अब इन नाकामियों और भ्रष्टाचारो को इस बात के आधार पर जस्टिफाई तो नही किया जा सकता है कि उन्हें उनकी जान बम के जरिये ले ली गयी थी क्योंकि दोनों ही अलग अलग मुद्दे है.