इमरान खान ने पाकिस्तान में बैठकर मोदी को चुनाव हराने के लिये चाल खेल दी है

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भारत और पाकिस्तान के सम्बन्ध आजादी के बाद से ही सही नही रहे लेकिन पिछले 5 साल में हालात बदले है. ये बदलाव ऐसा है जिसमे भारत लगातार पाकिस्तान पर हर मामले में चाहे वो सैन्य मामला हो, कूटनीतिक मसला हो या फिर रणनीति हो सब जगह पाक को पटखनी दे रहा है और ऐसे में पाकिस्तान नही चाहता है कि दुबारा से मोदी सरकार चुनकर के आये और ऐसे में पाक ने चुनाव से ठीक पहले दो चाल खेली है जिसके जरिये नरेंद्र मोदी को वोटो का नुकसान बैठे बिठाए करवाया जा सके. सबसे पहला काम इमरान खान ने विदेशी मीडिया को एक स्टेटमेंट देकर के किया है जिसमे वो कहते है कि वापिस मोदी को ही सत्ता में आना चाहिए, अगर वो सत्ता में वापिस आते है तो भारत के साथ में शान्ति होने के ज्यादा मौके बनेंगे और ज्यादा संभावना होगी.

अब इमरान खान के इस बयान के पीछे पूरी स्ट्रेटजी है पहला तो ये कि इमरान को नापसंद करने वालो की हिन्दुस्तान में एक पूरी फ़ौज है और अगर इमरान मोदी को फेवर करते है तो ये उन्हें खटकेगा और जाहिर तौर पर खटकेगा. इससे विपक्ष को भी सवाल खड़े करने का मौका मिल गया है और वो पूछ रहे है कि आखिर इमरान से आपका क्या रिश्ता है जो वो आपको जिताना चाह रहे है?

इस तरह से इमरान खान ने विपक्ष को बैठे बिठाए चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा थमा दिया है. दूसरा एक और काम पाक की तरफ से किया गया है बालाकोट में मीडिया को अब जाकर के ले जाया गया है जब एयर स्ट्राइक को 45 दिन के करीब बीत चुके है. वहाँ पर जाकर के दिखाया गया है कि देखिये किसी भी तरह की कोई भी क्षति नही हुई है.

इंडिया की एयर स्ट्राइक फेल हुई है और इस तरह से चुनाव से ठीक पहले वो ये प्रोप्रोगेंडा चलाकर के नरेंद्र मोदी की सत्ता में हुई एयर स्ट्राइक को फेल बताना चाह रहे है और चाहते है इससे उनके राष्ट्रवादी वोट टूट जाए. खैर अगर ऐसा है भी तो पाकिस्तान को मीडिया को वहाँ पर ले जाने में इतना वक्त क्यों लग गया? क्या वहां पर इतने वक्त तक रिपेयर का काम चल रहा था?