शत्रुघन सिन्हा का करियर चौपट, न घर के रहे न घाट के

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शत्रुघन सिन्हा इन दिनों अपनी राजनीति के बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहे है और उनपर जो बोया वही काटोगे वाली कहावत चरितार्थ होते हुए भी नजर आ रही है. बिहार का मुख्यमंत्री न बनाये जाने के चलते शॉटगन ने पहले तो बीजेपी में हल्की फुलकी बगावते शुरू कर दी. वो बार बार अलग अलग मंचो से पीएम मोदी और बीजेपी हाईकमान को कोसने लगे. ये सब वो तब कर रहे थे जब वो बीजेपी के ही मेंबर थे. उन्होंने बकायदा बीजेपी की ही खिलाफ चल रही सबसे बड़ी रैली महागठबंधन रैली में भी ममता बनर्जी का साथ दिया जिसके बाद में ये तय हो गया कि इस बार शत्रुघन सिन्हा का टिकट कटेगा और उनका टिकट कट भी गया.

उन्हें पटना साहिब से लोकसभा का टिकट नही दिया गया जिसके बाद में शत्रुघन सिन्हा अपनी महत्वकांक्षाओ के मारे दूसरी पार्टियों के चक्कर लगा रहे है और उन्होंने कांग्रेस का दामन थामने की तैयारी कर ली है. कांग्रेस उन्हें पार्टी में लेने को तो तैयार है लेकिन उनके लिए लोकसभा सीट का कोई भी इंतजाम नही है. दरअसल जिस पटना साहिब सीट से शत्रुघन सिन्हा लोकसभा चुनाव लड़ रहे है, उसे लेकर के आरजेडी काफी संवेदनशील है और अपना केंडीडेट उतार रही है.

ऐसे में क्योंकि बिहार में कांग्रेस और राजद के बीच में गठबंधन हो चुका है और दोनों ही मिलकर के चुनाव लड़ रहे है तो कांग्रेस का उस सीट से उम्मीदवार उतारने का सवाल पैदा ही नही होता. अब शत्रुघन सिन्हा के लिए राहुल गांधी पूरी राजद पार्टी से गठबंधन तो नही तोड़ लेंगे. ऐसे में शॉटगन हाल ही कांग्रेस ज्वाइन करने वाले थे लेकिन वो नही कर पाए क्योंकि कांग्रेस ने उन्हें पटना साहिब से टिकट देने का फैसला टाल दिया.

राजद उस सीट को छोड़ने को टस से मस होने को तैयार नही है और ऐसे में शत्रुघ्न सिंह के लिए तो न घर का न घाट का वाली स्थिति हो गयी है और लग रहा है इस बार उन्हें बिना टिकट ही रहना पड़ेगा. खैर इसकी शुरुआत तो खामोश मियाँ ने अपने बगावती तेवर दिखाकर के कर दिया था. अक्सर मुख्यमंत्री बनने की लालसा आपको लोकसभा संसद बनने लायक भी नही छोडती है. खैर अभी कांग्रेस 6 अप्रेल तक का समय कह रही है इस दौरान आरजेडी कुछ मूड बनाती है तो शायद उनका भला हो सकता है वरना तो भगवान् मालिक है.