स्मृति ईरानी के आगे राहुल गांधी की हवा टाइट, केरल से लड़ सकते है इस बार चुनाव

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उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीट शुरू से ही गांधी परिवार का गढ़ रही है और इस परिवार से ही लोग इस सीट पर चुनाव लड़ने के लिए उतरते रहे है लेकिन 2014 के चुनावो के बाद से ही लगातार यहाँ पर चुनावों के मायने ही बदल रहे है. दरअसल इस बार राहुल गांधी को टक्कर देने के लिए एक बार फिर से स्मृति इरानी को ही अमेठी से लोकसभा से टिकट दिया गया है. स्मृति इरानी ने पहले भी लोकसभा से चुनाव लड़ा था लेकिन वो हार गयी थी मगर हार से सबक लेकर के स्मृति इरानी ने अमेठी में पकड़ बनाने की कोशिश पूरे 5 वर्ष तक लगातार की है. उन्होंने आधिकारिक तौर पर अमेठी के 22 दौरे किये है. इन दौरों में वो रैली सभा और लोगो से निजी तौर पर भी मिली है.

स्मृति इरानी ने महिलाओं से भी कनेक्शन स्थापित करने की कोशिश की और तो और वो मिनिस्टर होने के नाते अमेठी के लिए जो कुछ भी कर सकती थी वो सब कुछ उन्होंने किया है.अब राजनीतिक विदूषक कह रहे है कि चुनावों में परिणाम चाहे जो भी निकले लेकिन एक बात तो साफ़ है कि अपनी मेहनत के दम पर स्मृति इरानी ने गांधी परिवार के इस गढ़ में सेंध लगा दी है और लोगो की मानसिकता बदली है.

अब ऐसे में राहुल गांधी के लिए ये काफी टेंशन वाली बात है क्योंकि अमेठी में ही उनका लोकसभा क्षेत्र है और अगर इस सीट पर उनकी एकतरफा जीत तय नही है तो फिर वो पार्टी को लीड करने की योग्यता भी खो ही देंगे, पीएम पद की दावेदारी तो दूर की बात है और ऐसे में राहुल गांधी अब अपना एक और चुनाव लड़ेंगे केरल से. अटकले लगायी जा रही है कि राहुल गांधी इस बार केरल के वायांद से चुनाव लड़ सकते है.

केरल के कांग्रेस चीफ ने खुद इस बात की पुष्टि की है, हालांकि कांग्रेस का आलाकमान अभी तक इस पर कुछ भी कहने से बच रहा है मगर ये सीट काफी ज्यादा सुरक्षित है और इसे कांग्रेस का गढ माना जाता है जहाँ पर कांग्रेस प्रत्याशी के हारने की प्रायिकता शून्य के बराबर ही होती है और इसी ब्राह्मास्त्र का उपयोग राहुल गांधी इस बार अपनी राजनीति को सुरक्षित करने के लिए करने वाले है.