मनोहर पर्रिकर की जिन्दगी के वो 4 किस्से जो उन्हें असली ‘हीरो’ बनाते है

3492

मनोहर पर्रिकर ने कैंसर से जूझते हुए आखिरकार अपने प्राण त्याग दिये. हर कोई उनके लिए प्रार्थना कर रहा था क्योंकि गोवा ने कभी भी इतना कर्मठ और जूझारू नेता नही देखा था. लेकिन कुदरत के आगे और शरीर से लड़कर भी आखिर किसकी चली है. आखिरकार कैंसर से लड़ते हुए 63 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने प्राण त्याग दिये. उनका काफी लम्बे समय तक इलाज भी चला था लेकिन बचाया नही जा सका. स्वयं राष्ट्रपति ने भी उन्हें श्रद्धांजली अर्पित की लेकिन आप जानते है पर्रिकर वाकई में कौन थे? चलिये कुछ किस्सों के जरिये जानते है, जो कही न कही उन्हें एक हीरो साबित करते है.

सादगी का प्रतिमूर्ति 

मनोहर पर्रिकर के पास एक सामान्य मकान था और स्कूटर से ही आना जाना करते थे. एक बार वो अपने स्कूटर से घूम रहे थे तो उन्हें एक ऑडी सवार ने टक्कर मार दी. टक्कर लगते ही वो उन पर चिल्लाने लगा ‘तुझे मालूम है मैं डीएसपी का बेटा हूँ.’ इस पर्रिकर ने हेलमेट उतारकर के कहा गाड़ी धीरे चलाओ बेटा, मैं गोवा का मुख्यमंत्री हूँ.

नही छोड़ा संघ का साथ 

मनोहर पर्रीकर संघ के बचपन से कार्यकर्ता रहे. उन्होंने आईआईटी बोम्बे से अपनी पढ़ाई पूरी की और फिर उन्हें बड़ी बड़ी कम्पनियों से ऑफर आये. उन पर प्रेशर भी था कि अब पॉलिटिक्स छोडो और अच्छा पैकेज लेकर सेटल हो जाओ लेकिन उन्होंने बीजेपी में बड़े जोर शोर से ज्वाइन की और सब छोडकर संगठन के लिये काम किया.

सर्जिकल स्ट्राइक 

उरी में अटैक के समय मनोहर पर्रिकर देश के रक्षामंत्री के पद पर थे. पूरा देश उस वक्त सदमे में था और जब अजीत डोवल ने सर्जिकल स्ट्राइक का प्रस्ताव दिया था तो उस पर प्रधानमंत्री को राजी करने वाले और सर्जिकल स्ट्राइक में मुख्य भूमिका निभाने वालो में पूर्व रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर का नाम भी शामिल है.

कर्तव्य 

मनोहर पर्रिकर ने पार्टी के प्रति निष्ठा और गोवा के प्रति कर्तव्य को अपने अंतिम सांस तक निभाया. जब वो अमेरिका से इलाज करवाकर के लौटे थे तब सभी को लगा था कि मनोहर पर्रीकर अब कुछ कर नही पायेंगे, लेकिन ऐसी हालत में जब उनका शरीर भी मेडिकल सपोर्ट से चल रहा था, उन्होंने गोवा का बजट पेश किया और पुल का निरीक्षण करने बाहर पहुँच गये थे.