आखिर कौन है ये बूढ़ी अम्मा जो राष्ट्रपति से पद्मश्री लेते हुए उन्हें आशीर्वाद दे रही है?

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देश में राष्ट्रीय पुरस्कार वितरण की पूरी प्रणाली बदल चुकी है. अब उन्हें पुरष्कार नही मिलता जो पारिवारिक चमचे होते है बल्कि उन्हें दिया जाता है जो वाकई में योग्य होते है और देश के लिये कार्य कर रहे है. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक बूढी अम्मा को भी पुरस्कार दिया और कोई छोटा मोटा पुरस्कार नही बल्कि पद्मश्री, जिसके लिए लोग अपना पूरा जीवन तक खपा देते है. जब पुरस्कार लेना होता है तो पुरस्कार लेते हुए दोनों को ही कैमरे की तरफ देखना होता है लेकिन बूढी अम्मा जिनका नाम थिमक्का है, उन्होंने रामनाथ कोविंद के सर पर हाथ रखकर के उन्हें आशीर्वाद दे दिया. प्रोटोकोल टूट गया लेकिन राष्ट्रपति के चेहरे पर मुस्कान जरुर आ गयी.

ये तस्वीर हर जगह छा गयी है लेकिन आपको ये भी जानना चाहिये कि आखिर थिमक्का कौन है? इनकी उम्र फ़िलहाल 106 वर्ष है और जब थिमक्का जी 40 वर्ष थी तब तक इन्हें एक भी संतान नही हुई और इससे थिमक्का बेहद ही दुखी हुई. वो जान देने जा रही थी लेकिन उनके पति ने उन्हें रोक लिया और उन्हें समझाया अपने लिये कुछ नही है तो समाज के लिये करो.

ये सोचकर थिम्क्का ने पेड़ लगाने का कार्य शुरू किया और आज तक थिमक्का ने कुल 8 हजार पेड़ लगा दिये है जिनकी उंचाई 10 फीट से भी ज्यादा है और वो बहुत ही ज्यादा घने है. इनमे से 400 पेड़ बरगद के है जो बहुत ही बड़े और विशालकाय है. थिमक्का ने न सिर्फ पेड़ लगाये है बल्कि उन सभी की देखभाल भी उन्होंने ही की है. देश की सरकार को उनका ये कार्य बहुत ही पसंद आया है क्योंकि 8 हजार पेड़ का मतलब एक पूरा का पूरा जंगल होता है और इस कटते पेड़ो के दौर में उनका ये कार्य अपने आप में बहुत ही सराहनीय है जिसे पद्मश्री से पुरस्कारित भी किया गया है.

थिमक्का इससे बेहद ही खुश है कि केंद्र सरकार ने उनके कार्य की परवाह की है और उन्हें सम्मानित की है लेकिन राज्य सरकार की तरफ वो अपने लिए अनदेखी करने की बात भी कहती है. फ़िलहाल उन्हें 500 रूपये प्रति माह के हिसाब से वृद्धावस्था की पेंशन भी मिलती है जो बहुत ही ज्यादा कम है.