मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से माँगी इजाजत, हमें करने दो मंदिर जमीन का अधिग्रहण

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राम मंदिर मसले पर केंद्र सरकार अचानक से एक्शन में आ गयी है और एक्शन भी कुछ ऐसा कि न पब्लिक, न मीडिया और न ही संसद, केंद्र सरकार सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुँच गयी है और वो भी अपना पक्ष लेकर जिसे देखकर के विरोधी तो विरोधी साथ ही साथ सपोर्टर भी हैरान है. दरअसल मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिट पिटीशन दायर की है और उसमे कहा है कि राम मंदिर मसले में सिर्फ 0.3 एकड़ जमीन विवादित है, उसे विवाद में चलने दीजिये लेकिन जो बाकी कि 67 एकड़ जमीन है उसे तो छोड़ दीजिये. उस पर आप फैसला देखिये जबकि बाकी कि जो 67 एकड़ जमीन है उसे उसके मालिको को लौटा देना चाहिए. आप कह सकते है कि ये सरकार ने जो सुप्रीम कोर्ट ने पूरी जमीन पर स्टे लगा दिया था उसे वापिस ले लेने की पिटीशन डाली है और क्योंकि सरकार कुछ कह रही है तो जाहिर तौर पर उसका वजन ज्यादा ही होगा.

अब ऐसी स्थिति में सरकार ने कहा है कि बाकी की जमीन राम जन्मभूमि न्यास को देने की अपील की है और कहा है अब उस जमीन पर मंदिर निर्माण की इजाजत मिल जानी चाहिये जो विवादित नही है. आपको बता दे आस पास की 2.77 एकड़ की जमीन कल्याण सिंह की सरकार ने अधिग्रहित कर ली थी और उसे हिन्दू पक्षकारो को देना था लेकिन बादमे इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इसके तीन हिस्से कर दिए जिसमे से एक हिस्सा सुन्नी व्फ्फ़ बोर्ड को भी मिला जो किसी को मंजूर नही था और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया.

अब सरकार की पिटीशन को अगर हरी झंडी मिल जाती है तो एक छोटे हिस्से को छोड़कर बाकी पूरे हिस्से पर मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा. आपको बता दे पहले सरकार का मत था कि सुप्रीम कोर्ट मामला खत्म कर ले उसके बाद ही हम आगे की कार्यवाही करेंगे लेकिन लगातार सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई की डेट आगे खिसकती चली जा रही है और लोगो के बीच रोष बढ़ रहा है. जिसके बाद केंद्र सरकार ने बढ़ते दबाव के चलते ये पिटीशन दायर की है.

इससे कुछ ही समय पहले योगी आदित्यनाथ भी सुप्रीम कोर्ट को टार्गेट करते हुए कह चुके है कि अदालत से अगर राम मंदिर पर फैसला नही हो पा रहा है तो हमें सौंप दे हम 24 घंटे में सब मामला निपटा देंगे.