राहुल गांधी फेल, अब प्रियंका गाँधी संभालेगी कांग्रेस

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नेहरु गांधी परिवार की वंशवाद की परम्परा को आगे बढ़ाते हुए प्रियंका गांधी ने भी आखिरकार आधिकारिक तौर पर कांग्रेस ज्वाइन कर ली. जमीन घोटाले के आरोपी रोबर्ट वाड्रा की पत्नी प्रियंका वाड्रा अब तक सिर्फ परदे के पीछे से कांग्रेस पार्टी को समर्थन दे रही थी लेकिन प्रियंका गांधी ने फ्रंटफुट पर आकर खेलने का फैसला किया है. राहुल गांधी ने भी बयान देते हुए यही कहा है कि अब वो फ्रंटफुट पर खेलने की तैयारी में है वो कांग्रेस की विचारधारा को बनाये रखने की कोशिश करेंगे. आपको बता दे प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश का कार्यभार सौंपा गया है और प्रियंका के साथ ही साथ आज की तारीख में ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी उत्तर प्रदेश के एक बड़े हिस्से का काम सौंपा है ताकि वो कांग्रेस के संगठन को मजबूत कर सके.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का संगठन धूल चाट रहा है, वोट बिखर चुके है और कार्यकर्ता मुरझा चुके है. ऐसी स्थिति में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नयी जान फूंकने के इरादे से प्रियंका गांधी को मैदान में उतारा गया है. कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि प्रियंका के राजनीति में आने से उन्हें जो ख़ुशी हुई है वो बयान नही कर सकती है और बीजेपी की तरफ से कहा जा रहा है कि प्रियंका हमारे लिये कोई चुनौती ही नही है,

वो सिर्फ एक टेम्परेरी बूस्ट है जो कुछ दिनों में निकल जाएगा इसलिये भारतीय जनता पार्टी इसे अपने तरीके से टेकल करने की कोशिश कर रही है. हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में इससे काफी ख़ुशी की लहर जरुर है क्योंकि वो लोग राहुल गांधी की तुलना में प्रियंका वाड्रा को बेहतर नेता मानते है. हाँ, पब्लिक में इससे एक गलत सन्देश जरुर जाता है कि कांग्रेस सिर्फ वंशवाद से पोषित होने वाली पार्टी है जहाँ गांधी और नेहरु परिवार में पैदा होने का मतलब सिर्फ और सिर्फ पार्टी का महासचिव और अध्यक्ष बनना ही है.

ऐसे में कांग्रेस में जितने भी मेहनत करने वाले नेता है जो उस पद तक पहुँचने की लालसा रखते है उनके सपनो पर पानी फिर जाता है. ऐसे मामले में बीजेपी की तारीफ़ भी होती है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी में अध्यक्ष हमेशा अलग बेकग्राउंड से आता है और कभी भी किसी पारिवारिक जुड़ाव के चलते केन्द्रीय नेतृत्व में किसी को जगह नही मिलती है जबकि कांग्रेस इसके बिलकुल ही उलट है. हाँ अगर भविष्य में काफी दूर की सोचे तो वो अगर राहुल गांधी से बेहतर परफॉर्म करती है तो राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी भी गंवानी पड़ सकती है.